सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में सांसदों की संभावित टूट-फूट की राजनीति को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल की समर्थक नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र की पक्षधर हैं और जिस तरह से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को तोड़ने की राजनीति की जा रही है, वह मतदाताओं के विश्वास के साथ विश्वासघात है।
अंजलि दमानिया ने कहा कि मतदाताओं ने किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि एक चुनाव चिह्न, एक विचारधारा और उस दल के प्रति विश्वास के आधार पर मतदान किया था। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों का पाला बदलना लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने वाला कदम है। उन्होंने कहा, ‘आज जिस तरह की फोड़-फोड़ की राजनीति चल रही है, वह बेहद घृणास्पद है। मतदाताओं ने जिन उम्मीदों और विश्वास के साथ मतदान किया था, उस जनादेश पर सीधा आघात किया जा रहा है। भाजपा ने जिस प्रकार का राजनीतिक माहौल बनाया है, उसे कहीं न कहीं रुकना ही चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की देरी पर भी उठाए सवाल
दमानिया ने इस पूरे घटनाक्रम पर न्यायपालिका की भूमिका को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर समय पर निर्णय नहीं होने से स्थिति और गंभीर होती जा रही है। उन्होंने कहा, ‘देश के सामने सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि संविधान की मूल भावना को चुनौती देने वाले मामलों पर भी लंबे समय तक निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। जब खुलेआम राजनीतिक दलों में टूट-फूट हो रही है और लोकतांत्रिक संस्थाएं प्रभावित हो रही हैं, तब भी न्यायिक प्रक्रिया में विलंब दिखाई देता है।’
‘जस्टिस डीलेड’ जस्टिस डिस्ट्रॉय’
दमानिया ने अंग्रेजी कहावत ‘जस्टिस डीलेड’ जस्टिस डिस्ट्रॉय’ का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय में अत्यधिक देरी अंतत: लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लोकतांत्रिक संस्थाएं और न्याय व्यवस्था समय रहते मजबूत नहीं हुईं तो लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
अंजलि दमानिया ने कुछ सांसदों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन नेताओं ने शिंदे गुट के उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़कर जीत हासिल की, वही अब उसी राजनीतिक खेमे में जाने की चर्चा में हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल दल-बदल नहीं, बल्कि मतदाताओं के विश्वास के साथ घात है।
