सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम ने २०१९ से बांद्रा से वर्सोवा तक समुद्री पुल का निर्माण कार्य शुरू किया था। छह साल की इस परियोजना का केवल २६ प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। परियोजना में देरी हो रही है और अब अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि वह परियोजना का कार्य पूरा करके मई २०२८ तक समुद्री पुल को सेवा में शामिल करें।
वर्ली से बांद्रा तक के समुद्री पुल का विस्तार बांद्रा से वर्सोवा तक किया जा रहा है। १७.१७ किलोमीटर लंबा और आठ लेन का यह बांद्रा से वर्सोवा समुद्री पुल निर्माणाधीन है। इस परियोजना का कार्य एमएसआरडीसी द्वारा २०१९ में शुरू किया गया था। हालांकि, ठेकेदार ने २०१९ से २०२२ के बीच परियोजना को बेहद धीमी गति से पूरा किया। इस वजह से इस अवधि में केवल २६ प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका। इसका कारण कोरोना संकट बताया गया। हालांकि, ठेकेदार के साझेदारों के साथ कठिनाइयों के कारण, ठेकेदार ने २०१९ से २०२२ के बीच कई महीनों तक कार्य पूरा नहीं किया।
तीन वर्षों में कार्य की धीमी गति को देखते हुए एमएसआरडीसी ने ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की और ठेकेदार पर जुर्माना लगाया गया। इस कार्रवाई के बाद ठेकेदार ने अंततः साझेदार कंपनी बदल दी और २०२२ में काम शुरू किया। हालांकि, कहा जाता है कि इसके बाद काम में तेजी आई है, लेकिन कुल छह वर्षों में इस परियोजना का केवल २६ प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि समुद्री पुल का २६ प्रतिशत काम अब तक पूरा हो चुका है। हालांकि, एमएसआरडीसी के अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी कठिनाइयों और चुनौतीपूर्ण कार्य के कारण काम में देरी हो रही है। जुहू कनेक्टर का मछुआरों द्वारा विरोध करने के कारण कनेक्टर का काम कई महीनों तक शुरू नहीं हो सका और् र्कनेक्टर का मार्ग बदलना पड़ा। बदलाव करके कनेक्टर का काम शुरू करने में डेढ़ साल लग गए। एमएसआरडीसी के अधिकारियों ने यह भी बताया कि मानसून के चार महीनों के दौरान काम धीमा पड़ जाता है क्योंकि मानसून के दौरान समुद्र में कोई काम नहीं किया जा सकता। अधिकारियों ने यह भी कहा कि परियोजना मई २०२८ तक पूरी हो जाएगी और समुद्री पुल चालू हो जाएगा। छह साल में २६ प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि शेष ७४ प्रतिशत काम ढाई साल में पूरा हो पाएगा या नहीं। इसलिए एमएसआरडीसी के सामने ढाई साल में काम पूरा करने की चुनौती होगी।
