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दिल्ली लाइव : ८ दिनों में २५ एफआईआर लोकतांत्रिक अधिकारों पर उठे सवाल!

-अरुण कुमार गुप्ता
राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ उठी आवाज अब पुलिस कार्रवाई और एफआईआर के मुद्दे पर भी बहस के केंद्र में है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर २ अक्टूबर से शुरू हुए प्रदर्शनों के सिलसिले में आठ दिनों के भीतर २५ एफआईआर दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन मामलों में सरकारी काम में बाधा, पुलिसकर्मियों पर हमले और निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन जैसे आरोप शामिल हैं। सवाल यह है कि राजधानी में विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की कार्रवाई कहां तक उचित है और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा कैसे होगी? कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन कार्रवाई की निष्पक्षता, उसका आधार और उसका अनुपात भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। आठ दिनों में २५ एफआईआर दर्ज होने का आंकड़ा अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि महज आठ दिनों के भीतर २५ मुकदमे दर्ज करने की नौबत आ गई? क्या यह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कार्रवाई है या फिर विरोध की आवाज उठाने वालों पर कानूनी शिकंजा कसने का मामला?
आंदोलन से घबराई सरकार?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन से
पहले होटल-गेस्ट हाउसों पर पुलिस का पहरा!
१० अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के आंदोलन से पहले राजधानी में पुलिस की सख्ती बढ़ गई है। होटलों और गेस्ट हाउसों में ठहरने वाले लोगों की जांच, रजिस्टरों की पड़ताल और दिल्ली पहुंचने वाले समूहों पर निगरानी की खबरों ने निजता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि बड़े जमावड़े और संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सुरक्षा की तैयारी के नाम पर आंदोलन में शामिल होने के इच्छुक लोगों की गतिविधियों पर इतनी निगरानी जरूरी है? क्या किसी होटल में ठहरना या दूसरे शहर से दिल्ली पहुंचना संदेह का पर्याप्त आधार हो सकता है? रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय बलों की २२१ कंपनियां, यानी करीब २३ हजार जवान, उपलब्ध कराने की तैयारी की है। होटल और गेस्ट हाउसों की जांच के साथ बसों की आवाजाही तथा छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों पर भी निगरानी की खबरें हैं।

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