मुख्यपृष्ठस्तंभदिल्ली लाइव : विरोध करने निकले तो हिरासत!

दिल्ली लाइव : विरोध करने निकले तो हिरासत!

-अरुण कुमार गुप्ता

लोकतंत्र में वोट सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि नागरिक की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है, लेकिन जब मतदाता सूची से लाखों नाम हटने का मुद्दा उठे और इसके विरोध में सड़कों पर उतरने वालों को हिरासत में लिया जाए, तो सवाल केवल चुनावी प्रक्रिया का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जवाबदेही का भी बन जाता है। दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान १५० से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था। ‘पीपल अगेंस्ट एसआईआर’ के बैनर तले जुटे प्रदर्शनकारियों में माकपा नेता वृंदा करात, छात्र संगठनों और महिला संगठनों के सदस्य भी शामिल थे। प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर मार्च रोक दिया। पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन के कारण सड़क यातायात बाधित हो रहा था। दिल्ली की प्रारूप मतदाता सूची से एसआईआर के दौरान ४७,५६,७२२ नाम हटाए गए थे। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, ये नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि जैसी श्रेणियों में रखे गए थे, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने के बाद सबसे अहम सवाल है कि प्रत्येक प्रभावित मतदाता को अपने नाम की स्थिति जानने, गलती सुधारने और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला या नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, २२ अक्टूबर तक फार्म-६ के कुल २,५०,७५४ आवेदन मिले थे। यह संख्या नए मतदाताओं और सूची से बाहर हुए लोगों दोनों के आवेदनों को मिलाकर है। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख ३० अक्टूबर बताई गई थी। विपक्ष और प्रदर्शनकारी संगठनों ने एसआईआर की प्रक्रिया, नाम हटाने के आधार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।
सियासत में ‘हैप्पीनेस क्लास’!
दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित सरकारी स्कूल में १२वीं की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने राजधानी की शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। सवाल यह है कि स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? २४ अक्टूबर को हुई घटना की जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल के आसपास कुछ सीसीटीवी वैâमरे काम नहीं करते मिले। पुलिस स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी शिक्षा निदेशालय, स्कूल के प्रधानाचार्य और पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। आप नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने राजनीतिक द्वेष के कारण हैप्पीनेस क्लास बंद कर दीं। उनके मुताबिक, इन कक्षाओं का उद्देश्य बच्चों को तनाव से निपटने और मानसिक रूप से मजबूत बनने में मदद करना था। उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीतिक मतभेदों का असर बच्चों की शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर क्यों पड़ना चाहिए?

अन्य समाचार