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तुमको पता है जी?

 -डाॅ. रवीन्द्र कुमार

1. जे. एफ. मदान निर्देशित फिल्म ‘इन्द्रसभा’ (1932) में 71 गाने थे, जो अब तक का रिकॉर्ड है। फिल्म 3 घंटे 31 मिनट लंबी थी, जिसमें 9 ठुमरी, 4 होली-गीत, 31 गज़ल, 5 छंद, 2 चौबेला और अन्य सामान्य गीत थे।
2. दूसरे नम्बर पर फिल्म शीरीं फरहाद (1931) (मदन थियेटर, कलकत्ता निर्मित) रही जिसमें 42 गीत थे।
3. जाॅनी वाकर, असली नाम बदरुद्दीन क़ाज़ी (1926-2003) ने बतौर मेन लीड (हीरो) भी कई फिल्में कीं थीं जैसे ‘दुनिया रंग रंगीली’ 1957, खोटा पैसा 1958, मिस्टर जाॅन 1959, मिस्टर कार्टून एम.ए. 1958, रिक्शावाला 1960 और जाॅनी वाकर 1957 ‘दुनिया रंग रंगीली’ में राजेंद्र कुमार एक साइड रोल में नज़र आये थे।
4. फिल्म पैगाम 1959 में नायिका वैजयंतीमाला की मां का रोल उनकी असली मां वसुधंरा देवी ने किया था जो अपने समय की विख्यात अभिनेत्री/नर्तकी थीं
5. भारतीय सिने जगत काले रंग से बहुत प्रभावित मालूम देता है। बाॅस लोग मिलने-मिलाने, लेन-देन के लिये काली पहाड़ी को चुनते हैं। गौर कीजिये फिल्मों के नामों पर: काला चोर, काला पानी, काला बाज़ार, काला पत्थर, काला आदमी, काला काला समंदर, काला घोड़ा, काला जादू, काला पहाड़, काला गुलाब, काला नाग, काला सवार, काला भूत, काला जिगर, काला सोना। गिनती जारी है…

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