मुख्यपृष्ठनए समाचारमुंबई के सबसे महंगे इलाके में पेयजल संकट!

मुंबई के सबसे महंगे इलाके में पेयजल संकट!

-बीकेसी में बोतलबंद पानी पर बढ़ी निर्भरता

-महंगे परिसरों में प्रदूषण का खौफ

-पानी पर लुटी जा रही गाढ़ी कमाई

द्रुप्ति झा / मुंबई

मुंबई के सबसे महंगे व्यावसायिक और आवासीय केंद्रों में शुमार बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) के निवासियों के सामने अब पीने के साफ पानी का संकट खड़ा हो गया है। आलीशान और महंगे घरों के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने वाले लोग आज अपनी सबसे बुनियादी जरूरत के लिए परेशान हैं। प्रदूषण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यहां के कई निवासी पीने और खाना बनाने के लिए बोतलबंद पानी पर हर महीने हजारों रुपये खर्च करने को मजबूर हैं।
करोड़ों के घर में रह रहे, लेकिन पानी पर भरोसा नहीं
बीकेसी, जिसे मुंबई का आधुनिक और विकसित चेहरा माना जाता है, वहां के निवासी इन दिनों एक अदृश्य डर के साए में जी रहे हैं। परिसर में प्रदूषण को लेकर पैâली आशंकाओं ने लोगों का भरोसा सामान्य जलापूर्ति से उठा दिया है। करोड़ों रुपये के अपार्टमेंट में रहने के बावजूद लोग पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता के लिए निजी कंपनियों के बोतल बंद पानी पर निर्भर हो गए हैं। मध्यम वर्ग तो दूर, अब मुंबई के संपन्न परिवार भी पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंतित हैं। एक अनुमान के अनुसार, केवल पीने और खाना बनाने के लिए बोतलबंद पानी मंगाने से हर घर के मासिक खर्च में हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
प्रशासन की नाकामी और पर्यावरण का दोहरा संकट
यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ओर लोग सुरक्षित पानी के लिए बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर हजारों प्लास्टिक बोतलों के उपयोग से कचरे का नया संकट पैदा हो रहा है, जो पर्यावरण के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकता है। नागरिकों का व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ता नजर आ रहा है और लोग अपनी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालकर खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। यह केवल पानी की समस्या नहीं, बल्कि आधुनिक और आलीशान विकास के दावों की भी परीक्षा है। जब देश के सबसे महंगे इलाकों में से एक में रहने वाले लोग भी स्वच्छ पेयजल को लेकर आशंकित हैं, तो आम मुंबईकरों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

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