-ईरानी नाव से ५२६ किलो मादक पदार्थ जब्त, पांच पाकिस्तानी गिरफ्तार; भारतीय रिसीवर और वितरण नेटवर्क अब भी रहस्य
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
भारतीय तटरक्षक बल और गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते ने संयुक्त अभियान में ईरानी नाव से करीब ५२६ किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत ३,००० करोड़ रुपए से अधिक बताई गई है। नाव पर सवार पांच पाकिस्तानी नागरिकों को हिरासत में लिया गया। बरामद खेप में हेरोइन और मेथामफेटामाइन होने की प्रारंभिक जानकारी है।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि नाव गुजरात की समुद्री सीमा में नहीं, बल्कि लक्षद्वीप के पश्चिम में पकड़ी गई। इसलिए गुजरात एटीएस की भागीदारी भर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि माल गुजरात में उतरना था। जांच का असली सवाल है, खेप किसने भेजी, उसका भारतीय खरीदार कौन था, भुगतान किस हवाला तंत्र से हुआ और माल कहां पहुंचाया जाना था?
गुजरात का नाम समुद्री ड्रग्स अभियानों में बार-बार आने से चिंता अवश्य बढ़ती है। राज्य की लंबी तटरेखा, कच्छ की खाड़ियां और ईरान-पाकिस्तान से जुड़े समुद्री मार्ग तस्करों को कई संभावित रास्ते देते हैं। हर बार नाविक पकड़े जाएं और किनारे बैठे वित्तपोषक तथा वितरक बच निकलें, तो हजारों करोड़ की कार्रवाई भी अधूरी ही मानी जाएगी।
अडानी संचालित मुंद्रा पोर्ट पर मिली थी सबसे बड़ी खेप
सितंबर २०२१ में राजस्व खुफिया निदेशालय ने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर दो कंटेनरों से २,९८८.२१ किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी। करीब २१,००० करोड़ रुपए मूल्य की खेप अफगानिस्तान से ईरान के बंदर अब्बास के रास्ते आई थी और दस्तावेजों में उसे ‘अर्ध-प्रसंस्कृत टैल्क स्टोन’ बताया गया था। मुंद्रा पोर्ट का संचालन अदाणी पोर्ट्स करता है। हालांकि, वहां खेप पकड़े जाने से कंपनी की संलिप्तता सिद्ध नहीं होती। बड़ा प्रश्न आज भी यही है, करीब तीन टन हेरोइन का वास्तविक भारतीय प्राप्तकर्ता कौन था?
