मुख्यपृष्ठसंपादकीयसाजिश कौन रच रहा है?

साजिश कौन रच रहा है?

गिरीश महाजन को गिरफ्तार करने के लिए साजिश रची जा रही है, ऐसा आरोप देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में लगाया। महाजन के खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई करने के लिए विशेष सरकारी वकील प्रवीण चव्हाण ने साजिश रची है और इसमें सरकार शामिल है, ऐसा श्री फडणवीस का कहना है। ये साजिश वैâसे रची गई, कौन किससे क्या बात कर रहा था? इससे संबंधित एक पेनड्राइव का टुकड़ा विपक्ष के नेता ने विधानसभा अध्यक्ष नरहरि झिरवल को सौंपा है। फडणवीस को लगा कि उन्होंने बहुत ही बड़ा बम गिराया है, परंतु सनसनीखेज खबरों से ज्यादा और कहीं कुछ खास होता दिखा नहीं। फडणवीस ने झिरवल को पेनड्राइव दिया था। ये वही झिरवल हैं, भाजपाइयों ने धोखे से जिनसे नवाब मलिक का इस्तीफा मांगनेवाले पत्र पर हस्ताक्षर ले लिया और बाद में हंगामा किया। श्री फडणवीस कानून के जानकार हैं। कहा जाता है कि नागपुर में उन्होंने कुछ समय तक वकालत की थी लेकिन महाजन के मामले में फडणवीस ने पटकथा तैयार की, वह रामसे बंधू की असफल भयकथा बन गई। सरकारी वकीलों ने महाजन के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचा, उसमें पुलिस और मंत्री भी शामिल हो गए। चाकू कहां और वैâसे प्लांट करना है, गले पर खून लगाना, ड्रग्स की रेड प्लांट करना और फिर महाजन के खिलाफ मकोका वगैरह लगाना, ऐसी साजिश थी, ऐसा श्री फडणवीस कहते हैं। इस पूरे ड्रामे की सवा सौ घंटों की रिकॉर्डिंग है, ऐसा श्री फडणवीस कहते हैं। मतलब जबरदस्त ही हो गया! सवा सौ घंटों की रिकॉर्डिंग को अजीबोगरीब घटना ही कहना चाहिए। केंद्रीय एजेंसियों की मदद व पैगासस जैसे ‘स्पायवेयर’ उपकरण का इस्तेमाल किए बगैर इस तरह से १२५ घंटों की रिकॉर्डिंग संभव नहीं है। दूसरी बात ये है कि इस पूरे ड्रामे की पटकथा लिखकर उसमें पात्रों को घुसाकर वीडियो फिल्म बनानेवाले लोगों की विपक्ष में मौजूदगी के बगैर सवा सौ घंटों की रिकॉर्डिंग हो ही नहीं सकती है। इसके लिए फडणवीस ने भी सलीम-जावेद को नियुक्त किया होगा तो अच्छा ही है। ये पूरी कहानी सरकारी वकील अपने मुंह से कह रहे हैं, ऐसा विस्फोट विपक्ष के नेता ने किया है। असल में ये सरकारी वकील विपक्ष के समर्थकों में शामिल बोलने वाले तोतों में शामिल नहीं हैं, ये वैâसे कह सकते हैं? गिरीश महाजन और एकनाथ खडसे के बीच जिले को लेकर झगड़ा है। महाजन की वजह से खडसे, भाजपा से बाहर निकले थे। खडसे को बाहर निकलना पड़े ऐसे हालात महाजन के जरिए तैयार किए गए, तो वहीं खड़से कहते हैं कि वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार और अधिकारी थे, इसलिए उनका कांटा निकाला गया। इस पर खडसे-महाजन के बीच झगड़ा भड़क उठा है। फडणवीस सरकार के दौरान महाजन का महत्व कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था और महाजन को लेकर फडणवीस काफी इमोशनल हैं। फडणवीस सरकार के हिसाब-किताब का बहीखाता महाजन ही संभाल रहे थे। जैसे ईडी के पास जीतू नवलानी आदि वसूली एजेंट हैं, वैसे ही श्री महाजन थे क्या, परंतु खडसे की तरह महाजन कोई लोकनेता नहीं थे। हालांकि उस समय ऐसी चर्चा थी कि अगर फडणवीस को कभी राष्ट्रीय राजनीति में जाना पड़ा तो वह अपनी पादुका महाजन को ही सौंप कर जाएंगे। अत: महाजन के मामले में श्री फडणवीस का इस तरह से आक्रामक होना, समझा जा सकता है। फडणवीस आरोप लगाने और माहौल बनाने में माहिर हैं, लेकिन महाजन साजिश मामले में वह अपेक्षित माहौल नहीं बना पाए। उस पर उन्होंने जो कोई भी वीडियो दिखाया, उस वीडियो की तारीख १ जनवरी, २०१९ दिखती है और राज्य में महाविकास आघाड़ी सरकार वर्ष २०१९ के नवंबर महीने में बनी थी। मेरा मतलब है, यह वीडियो उससे पहले का लगता है। तो अब सवाल यह है कि वास्तव में इसका सूत्रधार कौन है? इसका जवाब, यह कांड जिन्होंने रचा है उन्हें ही देना होगा। असल में भाजपा की एड़ी के नीचे काम करनेवाली केंद्रीय जांच एजेंसियां महाराष्ट्र की सरकार के खिलाफ किस तरह से साजिश रच रही हैं, यह जगजाहिर है। ‘साजिश’ शब्द का अर्थ क्या है ये फडणवीस को अपनी केंद्रीय जांच एजेंसी से समझ लेना चाहिए। ईडी, आयकर, एनसीबी, सीबीआई का काम फिलहाल भाजपा के विरोधियों के खिलाफ साजिश रचना ही शेष रह गया है तथा महाराष्ट्र पुलिस ने ईडी अथवा अन्य जांच एजेंसियों से साजिश रचने का प्रशिक्षण नहीं लिया है। नवाब मलिक के प्रकरण में ५५ लाख रुपए को ५ लाख रुपए वैâसे बनाया गया और दाऊद के नाम पर जमीन पर लाठियां वैâसे पीटी गर्इं? ये सामने आ ही गया है। केंद्रीय जांच एजेंसियोें एवं अदालतों से भी भाजपा समर्थित साजिशकर्ताओं को किस तरह से राहत मिल रही है, यही एक बड़ी साजिश है ऐसा राज्य के विरोधी दलों के नेताओं को क्यों नहीं लगना चाहिए? मूलत: ठाकरे सरकार राज्य के लोगों के लिए प्रतिबद्ध है, न कि विपक्ष की नौटंकी के लिए। इसलिए विपक्ष के नेता ने जो कोई भी स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो विधानसभा में पेश किया, उसमें जनहित जैसा कुछ भी नहीं है, अत: राज्य सरकार का इस मुद्दे पर ज्यादा ध्यान नहीं देना ही अच्छा होगा। गिरीश महाजन के लिए, फडणवीस ने विधानसभा में हंगामा किया, उसकी तुलना में उन्होंने राज्यपाल कोश्यारी द्वारा किया गया छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान और सावित्रीबाई फुले के उपहास को लेकर अंश भर भी हमला किया होता तो उनके पद और प्रतिष्ठा का मान बच गया होता। देवेंद्र फडणवीस को गिरीश महाजन की फिक्र हो रही है। वैसे होनी भी चाहिए, लेकिन किसी पर चाकू रखकर, गर्दन पर खून लगाकर, झूठे सबूत तैयार करके महाराष्ट्र पुलिस किसी के खिलाफ मकोका वगैरह लगाने के झमेले में नहीं पड़ती है। ऐसे तमाम राष्ट्रीय कार्यों में सीबीआई, एनआईए, ईडी के लोग निपुण हैं। आर्यन खान केस में क्या हुआ था? साजिश रचनेवाली एनसीबी के समर्थन में भाजपा के आयातित लोग किस दृढ़ता के साथ ख़ड़े हुए, यह तब देखने को मिला ही था। इसलिए श्री महाजन को झूठे मामले में फंसाया जाएगा, इस मानसिक साजिश से विपक्ष के नेता फडणवीस को बाहर निकलना चाहिए। महाजन बहुत स्वस्थ और शांत गृहस्थ हैं। जब फडणवीस जोरदार भाषण दे रहे थे, महाजन उनके बगल में बैठे थे और झपकी ले रहे थे। ऐसे में फडणवीस खुद कीे नींद क्यों उड़वा रहे हैं?

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