देश के मुख्य न्यायाधीश ने देश की युवा पीढ़ी के बारे में सच कहा है। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत पर टीका करने के बजाय उनके अभिनंदन का प्रस्ताव देशभर में पारित करने में कोई हर्ज नहीं। न्या. सूर्यकांत ने भारतीय युवाओं की तुलना गटर के कॉकरोचों से की है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्या. सूर्यकांत के मुंह से ‘सत्य’ निकल पड़ा और वे बोले, ‘‘समाज के पैरासाइट पहले ही व्यवस्था यानी सिस्टम पर हमला कर रहे हैं और आप उनका समर्थन कर रहे हैं? देश में ऐसे युवा हैं जो सिर्फ कॉकरोचों की तरह हैं। उनके पास नौकरी नहीं है। वे बेरोजगार हैं। उन्हें कोई काम-धंधा नहीं मिलता। उनमें से कुछ मीडिया में घुस जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया में और कुछ आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते हैं। कुछ लोग दूसरे क्षेत्रों के एक्टिविस्ट बन जाते हैं और उन हथियारों का इस्तेमाल कर दूसरों पर हमले करते हैं।’’ न्या. सूर्यकांत, माय लॉर्ड! आपने सच बोला। बारह साल एकछत्र राज करने वाली मोदी सरकार को आईना दिखा दिया। देश का ‘युवा’ सचमुच गटर के कॉकरोच की तरह जी रहा है। क्या करें! सालाना एक करोड़ रोजगार का सपना मोदी ने दिखाया था, वह झूठा निकला। युवाओं के पास रोजगार नहीं है। शिक्षा के अवसर नहीं हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर ‘लीक’ हो जाते हैं और युवाओं की सारी मेहनत गटर में चली जाती है और वे कॉकरोचों की तरह तड़पते हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें रील बनाना, पकोड़े तलना, गले में कमल छाप गमछा डालना, सड़कों पर, मस्जिदों के सामने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाना, लव जिहाद, हिंदू-मुसलमान के नाम पर दंगे करना ही सिखाया। यही भाजपा द्वारा युवाओं को दिया हुआ रोजगार है। माय लॉर्ड, जिन युवाओं ने देश के
स्वतंत्रता संग्राम में संघर्ष
किया, शहादत दी, उन युवाओं का जीवन मोदी सरकार ने कॉकरोचों जैसा बना दिया। युवाओं का स्वाभिमान, आदर, सम्मान, धैर्य… सब कुछ गटर में चला गया है। मुख्य न्यायाधीश ने इसी मामले में एक वकील को डांटा। वे बोले, ‘‘मैं कुछ मामलों की जांच में हूं। दिल्ली के बहुत से लोगों की एलएलबी डिग्री की मैं सीबीआई से जांच करवाने वाला हूं। हजारों लोग ऐसे हैं जो काले कोट पहनकर घूम रहे हैं। मुझे उनकी वकालत की डिग्री पर शक है। सीबीआई को जांच देनी पड़ेगी।’’ माय लॉर्ड, वाकई आपने फर्जी डिग्रियों को लेकर कड़वा सच रखा है। पर आम लोगों की डिग्रियां जांचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी की ‘मास्टर’ डिग्री की जांच के आदेश दीजिए। स्मृति ईरानी से लेकर भाजपा के मंत्रियों वगैरह की डिग्रियां जांचिए। नाम के आगे फर्जी डिग्रियों की उपाधियां लगाकर चलाए जा रहे प्रतिष्ठा के खेल को खत्म कीजिए। माय लॉर्ड, कॉकरोच सिर्फ गटर में ही नहीं हैं, बल्कि वे प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर न्याय व्यवस्था तक हर जगह हैं, मुख्य न्यायाधीश ने अब, ‘मेरे बयान का गलत अर्थ निकाला गया, फर्जी डिग्रियों के आधार पर जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में घुसपैठ की है, ऐसे लोगों के लिए मैंने बोला’ ऐसी सफाई दी। मगर, उनके इस स्पष्टीकरण में न अफसोस दिखता है न गलत बोलने का एहसास। असल सवाल यह है कि ये कॉकरोच बनाए किसने? भ्रष्ट न्याय व्यवस्था सरकार की गुलाम बन गई। चुनाव आयोग प्रधानमंत्री कार्यालय के कमोड का कॉकरोच बन गया है। सत्तापक्ष के कुछ कॉकरोच भारतीय संविधान के पन्ने कुतर रहे हैं। सिर्फ युवाओं को ही कॉकरोच की उपमा देकर क्या फायदा? देश में रोजगार के सारे मौके खत्म हो चुके हैं। पांच किलो अनाज पर देश की
बड़ी जनसंख्या
‘आत्मनिर्भर’ हो गई है! भारतीय रुपए का अवमूल्यन किया गया है, इसके लिए क्या मुख्य न्यायाधीश जिन्हें ‘कॉकरोच’ समझते हैं वह युवा पीढ़ी जिम्मेदार है? लोकतंत्र में भीड़तंत्र और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं को देशद्रोही ठहराकर सालों-साल जेल में बंद किया जाता है। उनकी सुनवाई नहीं होती। युवाओं को वे ऐसे कीड़े-मकोड़ों, कॉकरोच का जीवन देने में माय लॉर्ड, न्यायालयों का भी उतना ही योगदान है, यह सच नहीं है क्या? आपने युवाओं को कॉकरोच कहा। आप संतप्त हुए। न्यायाधीशों को भी गुस्सा आ सकता है। आखिर आप भी इंसान हैं। इसलिए गुस्सा, लोभ, माया, मत्सर, द्वेष… सब आपमें होंगे ही, पर फिर भी आप ऐसे ऊंचे स्थान पर बैठे हैं, जहां इस तरह की किसी भी भावना के लिए जगह नहीं है। संविधान का सम्मान कर आपको सिर्फ न्याय देना है। न्यायदेवी का कोई शत्रु नहीं है और कोई मित्र नहीं है। न्यायदेवी को सुविधा के हिसाब से तारीखें देकर किसी की अप्रत्यक्ष मदद नहीं करनी चाहिए। भारत के युवा आज राजनीति में हैं। वे आंदोलन करेंगे ही। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करेंगे ही। आज पत्रकारिता, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और न्यायालयों को निडर होकर काम करने की स्वतंत्रता नहीं है। देश की सार्वजनिक संपत्ति सरकारी उद्योगपति मित्रों को कौड़ियों के भाव दी जा रही है और युवाओं को मात्र रोजगार के लिए पकोड़े तलने की सलाह दी जा रही है। उनके गुस्से का विस्फोट होगा ही। ये युवा विद्रोही हैं इसलिए उन्हें धर्म की अफीम पिलाकर उनको कॉकरोच बना दिया गया है। भारतीय बेरोजगार युवा ही असंतोष के विस्फोटकों का गोदाम था। इन विस्फोटकों का कॉकरोच बनाकर सरकार खुशी से राज कर रही है। माय लॉर्ड, यह देशद्रोह है! कॉकरोचों को उनके हक दो। कॉकरोचों को स्वाभिमान दो। गटर ही उनका देश और सांस बन गया है। माय लॉर्ड, कॉकरोचों को ऐसे जीवन से मुक्ति दो!
