प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को विश्वगुरु मानते हैं, लेकिन उनका आचरण उस पद के अनुरूप कभी नहीं रहा। मोदी हाल ही में जापान और चीन की लंबी यात्रा पूरी करके स्वदेश लौटे हैं। विदेशों में उनकी ‘खिल खिलाकर’ हंसने वाली तस्वीरें प्रकाशित हुईं, लेकिन वे भारत लौटे तो रोते हुए चेहरे के साथ। उन्हें रोने का कोई न कोई बहाना चाहिए। अब उन्होंने इस बात को लेकर रोना-धोना शुरू कर दिया है कि बिहार में राहुल की ‘वोट अधिकार’ यात्रा के दौरान किसी ने कहीं मोदी की ‘मां’ को लेकर अपशब्दों का इस्तेमाल किया और वे रोने लगे। मोदी कहते हैं, ‘यह देश की मां-बहनों का अपमान है।’ बात यहां तक पहुंच गई कि भाजपाइयों ने इस मुद्दे पर ४ सितंबर को ‘बिहार बंद’ का आह्वान किया। इस ‘बिहार बंद’ में नीतीश कुमार की ‘जदयू’ पार्टी, जो इस समय पूरी तरह से राजनीतिक कोमा में है, भी शामिल हुई। मोदी की माताजी का निधन हो चुका है। भारत में माताओं और बहनों का हमेशा सम्मान करने की परंपरा रही है। न केवल मोदी की मां, बल्कि किसी की भी मां-बहन के प्रति किसी ने अपशब्दों का प्रयोग किया है तो कठोर शब्दों में उसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। चाहे वह प्रधानमंत्री की मां-बहन हो या कोई साधारण महिला। हमारे देश में किसी को भी इस पर असहमति रखने का कोई कारण नहीं है। द्रौपदी के अपमान के कारण इस देश में महाभारत हुआ और सीतामाई के कारण रामायण में संघर्ष हुआ। इसलिए, अगर किसी ने प्रधानमंत्री की मां के प्रति अपशब्दों का प्रयोग किया है (अगर ऐसा वास्तव में हुआ है, तो हम भी इसका निषेध करते हैं), तो यह गलत है, लेकिन क्या वास्तव में ऐसी कोई घटना हुई है? राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के मुंह से ऐसे अपशब्द कहां निकले यह किसी ने न तो देखा है और न ही सुना है। यात्रा के दौरान
विभिन्न स्थानों पर सभाएं
हुईं। उन सभाओं में भी, किसी ने मोदी की मां के बारे में अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया। मोदी एक ‘वोट चोर’ हैं और सभी ने कहा कि उस ‘वोट चोरी’ के कारण लोकतंत्र और भारत माता पूरी तरह से बदनाम हो गई। बिहार में राहुल गांधी की ‘वोट अधिकार’ यात्रा में भारी भीड़ थी। भाजपाई इस बात का रोना रो रहे हैं कि उस यात्रा में तिरंगा लेकर आए कुछ लोगों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। भाजपा पहले भी भीड़ में अपने ऐसे ऐरे-गैरे नत्थू खैरों को घुसाकर माहौल बिगाड़ने का काम कर चुकी है। इसलिए अगर तिरंगा हाथ में लिए कुछ लोगों ने किसी की मां-बहनों को याद किया है, तो इसके लिए पूरी तरह से भाजपा के लोग जिम्मेदार हैं। इस मामले में अब खुद प्रधानमंत्री आंसू टपकाते चेहरे के साथ उतर आए हैं और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश में लग गए हैं। मोदी कहते हैं, ‘मेरी मां के बारे में इस्तेमाल की गई भाषा बिहार की माताओं-बहनों का अपमान है और बिहार के हर बेटे को इस अपमान का बदला लेना चाहिए।’ मोदी ने यह भी एलान किया कि, ‘अगर कोई उनकी मां के बारे में कुछ भी कहता है, तो यह पूरी भारत माता का अपमान है और हम भारत माता का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।’ बिहार में हार के डर से मोदी का यह रोना-धोना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। क्योंकि मोदी ऐसे ही हैं। अगर मोदी की मां भारत माता हैं, तो देश की हर ‘मां’ भारत माता है और इन भारत माताओं का हर दिन अपमान हो रहा है। क्या मोदी ने कभी इन भारत माताओं के लिए छाती पीटी है? मणिपुर में महिलाओं को निर्वस्त्र कर दिया गया। एक सैनिक की पत्नी को निर्वस्त्र करके सड़कों पर घुमाया गया। उस समय मोदी को महिलाओं की गरिमा और भारत माता के
अपमान की याद
नहीं आई। एक कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत को एक टीवी डिबेट में ‘मां’ शब्द को लेकर एक भाजपा प्रवक्ता ने बेहद गंदे शब्दों में गालियां दीं। हमें उन शब्दों का इस्तेमाल करने और लिखने में शर्म आती है, लेकिन जब भाजपा प्रवक्ता ने ‘तेरी मां रंडी है’ भाषा का इस्तेमाल किया, तब भी मोदी और उनकी भाजपा का मातृप्रेम नहीं उबला। ऐसा नहीं दिखता कि किसी ने उस अपमान के लिए माफी मांगी हो। सोनिया गांधी को ‘कांग्रेस की विधवा’ और ‘जर्सी गाय’ किसने कहा था, जरा मोदी यह याद करने की कोशिश करें। राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं। लेकिन इसमें इस हद तक अश्लील शब्दों में व्यक्तिगत तौर पर प्रहार करना किस नैतिकता में फिट बैठता है, क्या मोदी हमें बताएंगे? मोदी ने तो शशि थरूर की पत्नी को भी सार्वजनिक तौर पर ‘पचास करोड़ की गर्लप्रâेंड’ कहा था। आज वही मोदी महिलाओं की गरिमा पर मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं। पिछले दस सालों में किसी भी प्रधानमंत्री ने भारतीय महिलाओं, संस्कृति और परंपराओं का उतना अपमान नहीं किया जितना प्रधानमंत्री मोदी ने किया है। मोदी देश के पहले और आखिरी प्रधानमंत्री होने चाहिए जिन्होंने महिलाओं का अपमान तो किया ही, लेकिन दूसरों का चरित्र हनन करने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल किया। मोदी उस चीनी प्रधानमंत्री का आतिथ्य पाकर भारत लौट आए जिसने भारत माता के इज्जत की ‘धज्जियां’ उड़ा दीं और यहां भारत माता के नाम पर छाती पीटने लगे। देश अब प्रधानमंत्री मोदी के रोने-धोने को गंभीरता से नहीं ले रहा है। भाजपा ने अपने लोगों को ‘वोट अधिकार’ यात्रा में घुसाकर ‘मां-बहनों’ को शर्मसार करवाया होगा। यही सबसे बड़ी संभावना है। मोदी प्रधानमंत्री कार्यालय में रोते-रोते दूसरों को गाली देते आए थे और वापसी यात्रा में भी रोते-रोते निकल रहे हैं। लेकिन इस दौरान जो देश की संस्कृति का ह्रास हुआ है उसका क्या?
