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उत्सव में करंट…प्रशासन बेफिक्र!

-लालबाग में बच्ची-महिला की मौत के बाद जोगेश्वरी के विसर्जन तालाब में गई १९ वर्षीय युवक की जान
-बिजली सुरक्षा के दावों की खुली पोल

सामना संवाददाता / मुंबई

गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में बिजली-सुरक्षा की प्रशासनिक लापरवाही लगातार जान ले रही है। लालबाग के गणपति पंडाल के पास करंट से आठ वर्षीय बच्ची और ३३ वर्षीय महिला की मौत तथा चार लोगों के घायल होने के बाद अब जोगेश्वरी के कृत्रिम विसर्जन तालाब में १९ वर्षीय रोहित भीमसिंह राठौड़ की करंट लगने से जान चली गई।
पंडाल के पास करंट, बच्ची समेत दो की मौत!
लालबाग के कालाचौकी विभाग सार्वजनिक उत्सव मंडल के प्रवेश-द्वार के पास बनाए गए अस्थायी पानी और शीतपेय स्टॉल में करंट फैलने से आठ वर्षीय रागिनी यादव और ३३ वर्षीय सुजाता की मौत हो गई।
गणपति उत्सव में मौत का करंट!
जोगेश्वरी-पूर्व के श्यामनगर स्थित लोकमान्य तिलक गणेश विसर्जन तालाब में रोहित महानगरपालिका द्वारा नियुक्त ठेकेदार के कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वह तालाब के पानी में मौजूद था, उसी दौरान पानी निकालने वाला मोटर पंप चालू था अथवा चला दिया गया। करंट लगने के बाद उसे ट्रॉमा केयर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इससे पहले लालबाग के कालाचौकी विभाग सार्वजनिक उत्सव मंडल के प्रवेश-द्वार के पास अस्थायी पानी और शीतपेय स्टॉल में करंट पैâल गया था। हादसे में आठ वर्षीय रागिनी यादव और ३३ वर्षीय सुजाता की मौत हुई, जबकि चार लोग घायल हो गए। पुलिस ने स्टॉल संचालक के विरुद्ध मामला दर्ज किया है।
दो हादसे, तीन मौतें—जिम्मेदार कौन?
दोनों घटनाओं के स्थान और परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन प्रशासनिक सवाल एक ही है, सार्वजनिक उत्सव स्थलों की वायरिंग, अर्थिंग, मोटर पंप और एमसीबी की जांच किसने की? विद्युत-सुरक्षा प्रमाणपत्र किस आधार पर दिया गया? निरीक्षण के बाद भी मौत हुई तो निगरानी अधिकारी की जवाबदेही क्यों तय नहीं होनी चाहिए?
लालबाग में अस्थायी स्टॉल और जोगेश्वरी में महानगरपालिका का कृत्रिम तालाब, दोनों स्थानों पर करंट से मौत महज संयोग नहीं मानी जा सकती। यह सुरक्षा व्यवस्था में बार-बार सामने आ रही गंभीर चूक का संकेत है।
जांच नहीं, जवाबदेही चाहिए!
मुंबई के सभी गणपति पंडालों और विसर्जन स्थलों का तत्काल विद्युत ऑडिट कराया जाए। दोषी पाए जाने पर केवल छोटे संचालक अथवा कर्मचारी पर मामला दर्ज न हो; संबंधित ठेकेदार, विद्युत निरीक्षक और जिम्मेदार मनपा अधिकारी की भूमिका भी जांची जाए।
स्टॉल वाले पर केस, जिम्मेदार अफसरों पर कब कार्रवाई?
लालबाग के कालाचौकी विभाग सार्वजनिक उत्सव मंडल के प्रवेश द्वार पर करंट लगने से बच्ची समेत दो की मौत हो गई थी। प्रारंभिक आशंका शॉर्ट-सर्किट और अस्थायी विद्युत व्यवस्था में गड़बड़ी की है, लेकिन अंतिम कारण पुलिस तथा विद्युत विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। इस हादसे ने मुंबई के हजारों गणपति पंडालों में अस्थायी वायरिंग, अर्थिंग और सुरक्षा निरीक्षण की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने स्टॉल संचालक के विरुद्ध मामला दर्ज किया है, लेकिन यह भी जांचना जरूरी है कि विद्युत कनेक्शन किसने दिया, वायरिंग किसने लगाई और संबंधित एजेंसियों ने उसका निरीक्षण किया था या नहीं। हादसे के बाद केवल छोटे स्टॉल संचालक पर कार्रवाई होगी या अनुमति और निरीक्षण देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी?

 

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