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डीएम के आदेश भी फाइलों में दफन! अब छज्जा गिरा, क्या हादसे का इंतजार है तहसील प्रशासन को?

राजेश सरकार / प्रयागराज

यमुनानगर जोन के बारा तहसील परिसर में शुक्रवार को जर्जर भवन का छज्जा टूटकर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि उस समय नीचे कोई कर्मचारी, अधिवक्ता या फरियादी मौजूद नहीं था, वरना तहसील प्रशासन की लापरवाही एक बड़े हादसे में बदल सकती थी। सवाल यह है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या किसी की जान जाने के बाद?
हैरानी की बात यह है कि जिस जर्जर भवन को लेकर लंबे समय से शिकायतें होती रही हैं, उसी भवन का निरीक्षण प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष वर्मा भी कर चुके हैं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताते हुए तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए थे। लेकिन लगता है कि तहसील प्रशासन ने डीएम के आदेशों को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया। नतीजा सामने है। अब भवन का छज्जा ही भरभराकर नीचे आ गिरा।
तहसील परिसर में आने वाले लोगों का कहना है कि जर्जर भवन से आए दिन प्लास्टर और मलबा गिरता रहता है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे। हर दिन सैकड़ों फरियादी, अधिवक्ता और कर्मचारी इसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा की चिंता प्रशासन को नहीं दिखी। शुक्रवार की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
हालांकि, उप जिलाधिकारी बारा शिखा शंखवार का कहना है कि छज्जा अपने आप नहीं गिरा, बल्कि बरसात के मौसम में किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा के मद्देनजर उसे गिराया गया है। लेकिन यदि ऐसा ही था, तो फिर महीनों से जर्जर भवन की मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? डीएम के निर्देशों के बाद भी भवन को सुरक्षित बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब तहसील प्रशासन के पास नहीं है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जर्जर भवन की तत्काल मरम्मत कराई जाए या फिर उसे पूरी तरह ध्वस्त कर नया भवन बनाया जाए। लोगों का कहना है कि हर बार हादसा टल जाने को प्रशासन अपनी उपलब्धि न समझे, क्योंकि किस्मत हमेशा साथ नहीं देती।

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