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पोल-खोल … मनपा के १००% नाला सफाई के दावों पर सवालिया निशान! …करोड़ों का टेंडर, नालों में कचरे का अंबार

सुरेश गोलानी / मुंबई
मनपा प्रशासन के दावों के अनुसार, शहर के सभी बड़े और छोटे नालों की सफाई १०० प्रतिशत पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर के कई बड़े नाले अब भी कूड़े-कचरे, गाद, मलबे और जल निकासी में बाधा डालने वाले अवरोधों से भरे पड़े हैं। कहीं सफाई का कार्य अधूरा है तो कहीं निकाली गई गाद को नालों के किनारे ही जमा कर दिया गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के शहर अध्यक्ष संदीप राणे का आरोप है कि कई स्थानों पर सफाई के नाम पर संबंधित ठेकेदारों द्वारा केवल औपचारिकता निभाई गई है, जिससे इस काम में भ्रष्टाचार की बू आना स्वाभाविक है और ऐसे हालातों में लोगों को बरसात के दौरान जलभराव का सामना करना लगभग तय है।
बता दें कि मीरा-भायंदर मनपा प्रशासन ने निजी कंपनियों को नाला सफाई और भारी बरसात के दौरान निचले और जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के लिए सक्शन पंप लगाने और उनके संचालन का ठेका दिया है। ४ करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के इन ठेकों के निविदा नियमानुसार ठेकेदारों को मनुष्यबल के अलावा जेसीबी, बोट-पोकलेन और हाइड्रोलिक अर्थ मूविंग मशीनों का उपयोग करके नालों की शत प्रतिशत सफाई करना है। ज्ञात हो कि शहर में १५० से ज्यादा बड़े और छोटे नाले हैं, जिनकी लंबाई लगभग २०० किलोमीटर है।
नाला सफाई में भ्रष्टाचार की बू
गौरतलब है कि नाला सफाई के दौरान मनुष्यबल, जेसीबी, पोकलेन और हाइड्रोलिक अर्थ मूविंग मशीनों का मनपा द्वारा भुगतान शिफ्ट/ प्रति घंटा किराए के हिसाब से किया जाता है, जिससे ठेकेदारों द्वारा बिलिंग प्रक्रिया में हेरफेर और कागजी खानापूर्ति जैसे भ्रष्ट तरीके अपनाकर अधूरी या बिना सफाई किए ही पैसे वसूलने की संभावना बहुत अधिक है। हालांकि, मनपा प्रशासन का दावा है कि मानसून से पहले नाला सफाई के कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट विभाग के कर्मचारियों और स्वच्छता निरीक्षकों द्वारा भौतिक स्थल निरीक्षण के अलावा जीपीएस-आधारित (काम के पहले और बाद) तस्वीरें और जियो-टैगिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।

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