छत्रपति शिवाजी महाराज पर छपी
पुस्तक के प्रकाशक को कहे थे अपशब्द
सामना संवाददाता / मुंबई
छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर छिड़े विवाद ने महाराष्ट्र की सियासत को गरमा दिया है। अब बयानबाजी के चलते शिंदे गुट बैकफुट पर नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा कि विवाद खड़ा कर सिर्फ चर्चा में बने रहने की कोशिश बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से शिंदे गुट के विधायक संजय गायकवाड को चेतावनी देते हुए संयम बरतने का संदेश दिया है। इस बीच गालीबाजी प्रकरण को लेकर कम्युनिस्ट संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है और सड़कों पर उतरकर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज कर दी है, जिससे यह मुद्दा अब राजनीतिक टकराव का बड़ा केंद्र बन गया है।
पिछले कुछ दिनों से बुलढाणा से शिंदे गुट के विधायक संजय गायकवाड द्वारा ‘शिवाजी कौन था?’ पुस्तक के प्रकाशक प्रकाश आंबी को दी गई गालियों को लेकर राज्य में विवाद पैदा हो गया है। गायकवाड के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग को लेकर कम्युनिस्ट और प्रगतिशील कार्यकर्ता आक्रामक हो गए हैं, वहीं गायकवाड ने लेखक गोविंद पानसरे पर मरणोपरांत केस दर्ज करने की मांग की है। इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दोनों पक्षों को फटकार लगाते हुए अप्रत्यक्ष रूप से विधायक गायकवाड को भी सुनाया। बार्शी दौरे पर आए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भगवान के दर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। इस दौरान विधायक गायकवाड के घर पर कल कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से मोर्चा भी निकाला गया। इस बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पुस्तक को लेकर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है। देश में छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान कोई नहीं कर सकता। उनका सम्मान इतना बड़ा है कि इस तरह से उनका अपमान करना संभव ही नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि गोविंद पानसरे ने यह पुस्तक १९७९ में लिखी थी।
