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सप्लाई चेन टूटने से राज्य की ४० हजार फैक्ट्रियों पर बंदी का खतरा!

– पेट्रोकेमिकल की कमी से फैक्ट्रियां ठप
– तालाबंदी के कगार पर उद्योग जगत
सामना संवाददाता / मुंबई
ईरान-अमेरिका टकराव ने वैश्विक सप्लाई चेन को तोड़कर रख दिया है। इसका सीधा असर अब महाराष्ट्र के उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। कच्चे माल खासकर पेट्रोकेमिकल, गैस और कांच की भारी कमी के कारण हजारों फैक्ट्रियों का उत्पादन ठप पड़ चुका है, जिससे पूरा एमएसएमई सेक्टर गहरे संकट में फंस गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि करीब ४० हजार कंपनियों पर बंदी का खतरा मंडराने लगा है।
आलम यह है कि उद्योग जगत में बेचैनी बढ़ती जा रही है और अगर अगले तीन महीनों में स्थिति सामान्य नहीं हुई तो राज्य में बड़े पैमाने पर तालाबंदी तय मानी जा रही है। कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं, लेकिन तैयार माल को उचित दाम नहीं मिल रहा, जिससे उद्योगपति मुश्किल में फंस गए हैं।

गल्फ वॉर से राज्य के लघु और मध्यम उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित!

ईरान-अमेरिका युद्ध का असर राज्य के लघु और मध्यम उद्योगों पर साफ दिखाई देने लगा है। राज्य के पुणे, ठाणे और नई मुंबई जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में हालात गंभीर हो गए हैं। कच्चे माल की कमी के कारण गैस, पेट्रोकेमिकल, कांच और प्लास्टिक पर निर्भर कई पैâक्ट्रियों का उत्पादन ठप पड़ गया है।
हिंदुस्थान की करीब ४० प्रतिशत कंपनियां पेट्रोकेमिकल पर निर्भर हैं। खासकर फार्मा कंपनियों को कांच की बोतलों की जरूरत होती है, लेकिन उनकी भी भारी कमी है। वहीं प्लास्टिक बोतलों के लिए जरूरी कच्चा माल नहीं मिलने से उत्पादन रुकने के कगार पर है। कई पैâक्ट्रियों ने उत्पादन कम कर दिया है और कर्मचारियों की छंटनी भी शुरू कर दी है। इसका असर जीएसटी कलेक्शन पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। महाराष्ट्र इंडस्ट्री डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रकांत सालुंखे ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पेट्रोकेमिकल की भारी कमी हो गई है। लघु और मध्यम उद्योगों को जरूरी गैस, कांच और प्लास्टिक जैसे कच्चे माल नहीं मिल पा रहे हैं। जो मिल रहा है, वह भी महंगा है।

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