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संगम में किसानों का जल सत्याग्रह, सरकार-प्रशासन को खुली चेतावनी, बोले- अब आर-पार की लड़ाई

राजेश सरकार / प्रयागराज

किसानों की अनदेखी और जनसमस्याओं पर सरकारी उदासीनता के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (युवा) ने गुरुवार को संगम की धारा में उतरकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया। गंगा-यमुना के बीच पानी में खड़े किसानों और युवा नेताओं ने जोरदार नारेबाजी करते हुए साफ कहा कि यदि अब भी सरकार और प्रशासन नहीं चेते तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।
हम लड़ रहे हैं हक की लड़ाई
प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि किसानों, युवाओं और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान अपनी जमीन बचाने, सिंचाई, खाद और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि युवा रोजगार के अभाव में भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे बैठे हैं।
प्रशासनिक विफलता का मानक बन चुकी हैं समस्याएं
किसान नेताओं ने कहा कि गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली और नालियों की बदहाली तथा शहर में हर बारिश के बाद जलभराव अब प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बन चुका है। बार-बार शिकायतों और आंदोलनों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है।
दोहराई गई मांगें
जल सत्याग्रह के दौरान किसानों ने भूमि पर कथित अवैध कब्जों को हटाने, भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने, शंकरगढ़ समेत ग्रामीण इलाकों की बदहाल सड़क, बिजली और पेयजल व्यवस्था में सुधार करने तथा प्रयागराज में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग दोहराई।
हिंसक घटना का मुद्दा भी उठाया
आंदोलन में एयरपोर्ट थाना क्षेत्र में किसान की भूमि पर कथित कब्जे और धरना स्थल पर हुई हिंसक घटना का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि घटना में एक नाबालिग दलित बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई थी, लेकिन अब तक दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसे प्रशासन की संवेदनहीनता बताते हुए उन्होंने तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
चेतावनी
भाकियू (युवा) ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जल सत्याग्रह को और उग्र तथा व्यापक बनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

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