मुख्यपृष्ठस्तंभपाक-अफगान की ‘नूराकुश्ती' में अमेरिका ‘पंच परमेश्वर'!

पाक-अफगान की ‘नूराकुश्ती’ में अमेरिका ‘पंच परमेश्वर’!

अंधा बांटे रेवड़ी…!

मनमोहन सिंह

लीजिए साहब! दुनिया का सबसे ब़ड़ा ‘शांतिदूत’ अमेरिका एक बार फिर पाकिस्तान पर मेहरबान नजर आ रहा है। अफगानिस्तान की सीमा पर जब बमों के पटाखे फूट रहे थे, तो अंकल सैम ने पाक को पीठ थपथपाते हुए कहा, ‘लगे रहो मियां, तुम्हें सेल्फ डिफेंस का पूरा हक है।’ इसे कहते हैं ‘अंधा बांटे रेवड़ी, फिर-फिर अपनों को दे’!
कल तक जो अमेरिका पाकिस्तान को आतंकवाद की ‘नर्सरी’ मानकर आंखें तरेरता था, (एबटाबाद, ओसामा बिन लादेन वाले मामले को ट्रंप शायद भूल गए हैं या भूलने की कोशिश कर रहे हैं या भूलने का नाटक कर रहे हैं, इसे कहते हैं नेशन फर्स्ट!) आज वही उनके दुख में ‘आंसू बहा रहा है’। वाह री डिप्लोमेसी! वैसे, इस बहती गंगा में हाथ धोने का असली मजा तो पाकिस्तान को आ रहा है। खुद के घर में कंगाली का रोना है, लेकिन पड़ोसियों पर ड्रोन उड़ाने का पूरा शौक है। ऊपर से अमेरिका का यह खुला समर्थन पाकर पाकिस्तान तो अब ‘फूले नहीं समा रहा’। उसे लग रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा आते ही उनकी तो ‘पांचों उंगलियां घी में और सिर कढ़ाई में’ आ गया है।
उधर, अफगान तालिबान भी कम नहीं है। वह पाकिस्तान के आरोपों पर ऐसे मासूम बन जाते हैं जैसे ‘दूध के धुले’ हों। जब पाकिस्तान कहता है कि टीटीपी वाले तुम्हारी जमीन से हम पर गोले बरसा रहे हैं, तो तालिबान पलकें झपकाकर कहता है, ‘अरे भाई, यह तो आपका अंदरूनी मामला है, हमारे यहां तो सब शांति-शांति है।’ इसे कहते हैं ‘जैसी करनी वैसी भरनी’!
पाकिस्तान अब अमेरिका और इजरायल के बीच ‘बिचौलिया’ बनने के ख्वाब देख रहा है। जेब में नहीं दाने, चले भुनाने! खुद के घर के झगड़े संभल नहीं रहे और चले हैं दुनिया की पंचायत करने। अब देखना यह है कि अमेरिका की इस शह पर पाकिस्तान कब तक ‘आसमान पर उड़ता है’, क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब-जब अमेरिका ने किसी को कंधा दिया है, उसने बाद में ‘बगलें झांकने’ पर मजबूर ही किया है!

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