मुख्यपृष्ठनए समाचारएफडीए का रोना... लैब नहीं है, कैसे होगी कार्रवाई!

एफडीए का रोना… लैब नहीं है, कैसे होगी कार्रवाई!

-६ महीने बाद आती है रिपोर्ट बच निकलते हैं मिलावटखोर

रामदिनेश यादव / मुंबई

पुणे में जहरीली शराब की घटना के बाद एक बार फिर मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा गरमा गया है। ऐसे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं, लेकिन एफडीए का अलग ही रोना है। एफडीए में दरअसल नमूनों की जांच के लिए लैबोरेटरी का टोटा है। पूरे राज्य में तीन ही लैब हैं और इनकी क्षमता भी ५० नमूनों से कम है। ऐसे में एफडीए यदि किसी मिलावटी पदार्थ की जांच करवाती है तो रिपोर्ट आने में ६ महीने से लेकर डेढ़ से तीन साल लग जाते हैं। जबकि नियम के अनुसार १४ दिनों में रिपोर्ट मिल जानी चाहिए। ऐसे में आरोपी पर कार्रवाई चाहकर भी करना मुश्किल हो जाता है। आरोपी आसानी से बच निकलते हैं।
राज्य में खाद्य पदार्थों में मिलावट, घटिया गुणवत्ता और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल के मामलों में एफडीए विभाग द्वारा लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट तय समय में नहीं मिलने से मिलावटखोरों पर कार्रवाई अटक रही है। एफडीए के पास लैब की संख्या तीन है, इसमें से एक तो कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है।
बता दें कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग प्रकार की मिलावट बड़े पैमाने पर सामने आ रही है। पश्चिम महाराष्ट्र में दूध, मराठवाड़ा में खाद्य तेल, विदर्भ में गुटखा और मुंबई, पुणे व ठाणे क्षेत्र में दूध में मिलावट के मामले अधिक पाए जा रहे हैं। वहीं दौंड इलाके के गुड़ उत्पादन केंद्रों में गुड़ में घटिया चीनी मिलाने तथा एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी चॉकलेट और मिठाइयों के इस्तेमाल की शिकायतें भी सामने आई हैं।
यहीं होती है चूक
जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी जब किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट, निकृष्ट गुणवत्ता या रासायनिक इस्तेमाल का संदेह पाते हैं तो उसके नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। नियमों के अनुसार रिपोर्ट १४ दिनों में या अधिकतम एक से डेढ़ महीने में मिल जानी चाहिए। साथ ही रिपोर्ट का खाद्य पदार्थ की एक्सपायरी डेट खत्म होने से पहले उपलब्ध होना जरूरी माना जाता है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल उलट है।
घोषणा के बाद भी लैब नहीं
सबसे बड़ी समस्या राज्य में जांच प्रयोगशालाओं की कमी को माना जा रहा है। फिलहाल, राज्य सरकार के पास मुंबई, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर में केवल तीन सरकारी प्रयोगशालाएं हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए पुणे, नासिक, यवतमाल और रायगड में नई प्रयोगशालाएं बनाई जा रही हैं। हालांकि, रायगड में अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है, जबकि अन्य स्थानों पर काम अंतिम चरण में बताया जा रहा है।

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