– सतयुग में पाप का अंश शून्य प्रतिशत था और पुण्य सौ प्रतिशत था।
– लोग केवल सत्य ही बोलते थे, झूठ का कोई स्थान नहीं था।
– छल, कपट, धोखा और बेईमानी जैसे दुर्गुण नहीं थे।
– कोई व्यक्ति भूखा नहीं सोता था।
– भिखारी नहीं होते थे।
– लोगों के बीच वाद-विवाद नहीं होते थे।
– लोग दयालु और परोपकारी होते थे।
– हिंसा और नफरत का कोई अस्तित्व नहीं था।
– लोग स्वार्थ से दूर थे।
– सब लोग मिलजुल कर रहते थे।
– सभी लोग शाकाहारी थे।
– लोग नियमित रूप से मंदिरों में पूजा-पाठ के लिए जाते थे।
– देवी-देवताओं में लोगों की गहरी आस्था थी।
– लोग संस्कारी और सभ्य थे।
– एक-दूसरे का आदर-सम्मान करते थे।
– प्राकृतिक आपदाएं नहीं होती थीं।
– लोग सुखी और खुशहाल जीवन जीते थे।
– सब संतुष्ट थे।
– चोरी और डकैती जैसे अपराध नहीं होते थे।
– सभी में लज्जा और शर्म का भाव था।
– देवी-देवता लोगों के बीच रहते थे।
– लोग बीमार नहीं पड़ते थे।
– जन्म लेने वाले बच्चे अपनी पूरी आयु जीते थे।
– अकाल मृत्यु नहीं होती थी।
– लोग दीर्घायु होते थे और हजारों-लाखों वर्षों तक जीते थे।
-लक्ष्मीकांत चौरसिया
