मुख्यपृष्ठस्तंभफोकस : एनएमएमसी का ‘कमाल' ... मोबाइल फ्लैशलाइट में रोड़ कंक्रीटिंग

फोकस : एनएमएमसी का ‘कमाल’ … मोबाइल फ्लैशलाइट में रोड़ कंक्रीटिंग

एम. एम. एस.

नई मुंबई महानगरपालिका अक्सर अपने आधुनिक बुनियादी ढांचे और स्वच्छता के लिए चर्चा में रहती है, लेकिन हाल ही में कोपरखैरने के बोनकोडे (सेक्टर १२) से सामने आई एक तस्वीर ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां आंतरिक सड़क के कंक्रीटिंग का काम किसी हाई-टेक मशीनरी या फ्लडलाइट की रोशनी में नहीं, बल्कि मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट के सहारे किया जा रहा है। यह घटना न केवल तकनीकी लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि नागरिक प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर एक तमाचा भी है।
अंधेरे में विकास या भ्रष्टाचार का खेल?
सड़क निर्माण, विशेषकर कंक्रीटिंग, एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें सटीकता, सही ढलान और सामग्री के समान वितरण की आवश्यकता होती है। इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार, कंक्रीट बिछाते समय पर्याप्त रोशनी और अधिकृत सुपरवाइजर की उपस्थिति अनिवार्य है। लेकिन जब काम रात के अंधेरे में मोबाइल की मद्धम रोशनी में हो रहा हो तो गुणवत्ता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। क्या अंधेरे में काम करना किसी बड़ी अनियमितता को छिपाने की कोशिश है?
सुरक्षा और गुणवत्ता की बलि
मोबाइल की फ्लैशलाइट में काम करने के कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
घटिया निर्माण; कम रोशनी में कंक्रीट की मोटाई और सतह की फिनिशिंग का सही आकलन असंभव है। ऐसी सड़कें पहली बारिश भी नहीं झेल पातीं।
निगरानी का अभाव; नियमों के मुताबिक, कंक्रीटिंग के दौरान जूनियर इंजीनियर का मौके पर होना जरूरी है। फ्लैशलाइट का सहारा लेना यह बताता है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके से नदारद हैं और ठेकेदार अपनी मनमानी कर रहा है।
जानलेवा लापरवाही!
निर्माणस्थल पर भारी मशीनरी और मजदूरों के लिए पर्याप्त रोशनी न होना किसी बड़े हादसे को न्योता देना है।
सिस्टम की चुप्पी और जनता का पैसा
यह स्थिति पुरानी कहावत को चरितार्थ करती है कि ‘जब व्यवस्था जानबूझकर दूसरी तरफ देखती है, तभी खामियां अपनी जड़ें जमाती हैं।’ कोपरखैरने जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय और प्रमुख क्षेत्र में यदि सार्वजनिक धन का ऐसा दुरुपयोग हो रहा है तो शहर के अन्य कम दृश्यमान हिस्सों की स्थिति क्या होगी? करदाताओं की गाढ़ी कमाई का उपयोग इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना गतिविधियों में होना नागरिक प्रशासन की अखंडता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
यह मामला केवल एक सड़क के निर्माण का नहीं, बल्कि व्यवस्थागत विफलता का है। एनएमएमसी प्रशासन को इस घटना का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। इस कार्य का स्वतंत्र तकनीकी निरीक्षण एनी इंडिपेंडेंस ऑडिट होना चाहिए और दोषी ठेकेदारों व अनुपस्थित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पारदर्शिता और जवाबदेही कोई विकल्प नहीं, बल्कि सुशासन की अनिवार्य शर्त है। अगर आज इस ‘फ्लैशलाइट संस्कृति’ को नहीं रोका गया तो नई मुंबई का बुनियादी ढांचा अंधेरे में ही खो जाएगा।

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