गजल

इश्क में आदमी बीमार भी हो सकता है
जुल्फें-जानां में गिरफ्तार भी हो सकता है
ये न समझो कि है सब खत्म तुम्हारे दम पर
दिल में फिर कोई नया प्यार भी हो सकता है
ऐसा मुमकिन नहीं हर वक्त वो इकरार करें
उनके मुंह पर कभी इनकार भी हो सकता है
ठोकरें खा के ज़रुरी नहीं गिरना लोगो
जिंदगी का नया आधार भी हो सकता है
तेरा मिलना जो मुकद्दर में लिखा हो जानम
हिज्र के बाद तो दीदार भी हो सकता है
छोड़ देना न कभी देखना तुम सपनों को
स्वप्न एक दिन कभी साकार भी हो सकता है
ऐ ‘कनक’ होता है जिस शख्स के अल्फाज में दम
देखना वो बड़ा फनकार भी हो सकता है।
-डॉ. कनक लता तिवारी

अन्य समाचार