-गणेश विसर्जन के बाद कार्रवाई का दावा
-६८० फर्जी शिक्षकों को जारी हुआ नियमित वेतन
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र का फर्जी शिक्षक घोटाला अब महायुति सरकार की काबिलियत पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। ६८० फर्जी शिक्षकों को सालों तक वेतन बांटकर सरकारी खजाना लुटाया गया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सरकार सिर्फ दावे कर रही है। अब गणेश विसर्जन के बाद बड़ी कार्रवाई का शोर मचाया जा रहा है, मगर हकीकत यह है कि ४५६ फाइलों की जांच के लिए महज चार कर्मचारी लगाए गए हैं। नतीजा साफ है कि जांच की रफ्तार कछुए से भी धीमी है। ऐसे में विपक्ष आरोप लगा रहा है कि मामले में लिए जा रहे फैसले से साबित हो रहा है कि महायुति सरकार असली दोषियों को बचाने के लिए लीपापोती कर रही है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नागपुर जिले का चर्चित शालार्थ आईडी घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। सूत्रों के मुताबिक, गणेश विसर्जन के बाद फर्जी शिक्षकों पर बड़ी कार्रवाई होने वाली है। इस घोटाले में नकली नियुक्ति पत्रों के आधार पर ६८० फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति दिखाई गई थी, जिन्हें नियमित वेतन भी जारी होता रहा, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। अब इन वेतन की वसूली के लिए न्यायालय से अनुमति ली जाएगी। सूत्रों ने बताया कि दिवंगत शिक्षा अधिकारी सोमेश्वर नैताम के हस्ताक्षर से कितने नकली नियुक्ति आदेश निकाले गए, इसकी पूरी जानकारी शिक्षा उपसंचालक कार्यालय ने मांगी है। जांच में अब तक दो कंप्यूटर, वेतन पथक अधीक्षक नीलेश वाघमारे का लैपटॉप, मंघाम का मोबाइल और वाई-फाई डिवाइस जब्त किए जा चुके हैं। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद आरोपी जमानत के लिए आवेदन कर रहे हैं।
कम कर्मचारी, ढेरों फाइलें
पहले भी स्टाफ की कमी के कारण फाइलों की जांच समय पर पूरी नहीं हो पाई थी। प्राथमिक शिक्षा विभाग की १,०५५ फाइलों में से २४ की जांच बाकी है। वहीं माध्यमिक विभाग की १,०३६ फाइलों में से २८० की जांच अधूरी थी। इनमें से ८० की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि २०० लंबित रहते ही और २३२ नई फाइलें आ गईं। अब स्थिति यह है कि प्राथमिक विभाग की २४ और माध्यमिक विभाग की ४३२ यानी कुल ४५६ फाइलों की जांच सिर्फ ४ कर्मचारियों के भरोसे है।
