मुख्यपृष्ठविश्वइंफोसिस-टीसीएस समेत ८ कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदन रोके

इंफोसिस-टीसीएस समेत ८ कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदन रोके

अमेरिकी श्रम विभाग ने इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल, कॉग्निजेंट, वैâपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को PERM कार्यक्रम से निलंबित किया है। यह H-1B वीजा पर सीधी रोक नहीं, बल्कि रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का एक अहम चरण है।
अमेरिकी प्रशासन ने आठ बड़ी टेक और आईटी कंपनियों से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन यानी PERM आवेदनों पर रोक लगा दी है। श्रम विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों के नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और पहले से लंबित आवेदनों पर भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। प्रशासन का आरोप है कि विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से अमेरिकी कामगारों के रोजगार और वेतन को नुकसान पहुंचा। ये आरोप हैं; कंपनियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई का अंतिम नतीजा अभी सामने नहीं आया है।
सूची में कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, HCL टेक्नोलॉजीज और वैâपजेमिनी के साथ माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि २००९ से इन कंपनियों ने करीब ३० लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किया और उन्हें २.३० लाख से अधिक H-1B वीजा मंजूरियां मिलीं।
इसका भारतीय पेशेवरों पर क्या असर?
झ्ERश् प्रक्रिया अमेरिकी नियोक्ता को किसी विदेशी कर्मचारी के रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए श्रम प्रमाणन दिलाने में मदद करती है। इस पर रोक से इन कंपनियों में काम कर रहे कुछ कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अटक सकती है। मगर यह सभी भारतीय आईटी पेशेवरों के H-1B वीजा रद्द होने या नई H-1B नियुक्तियों पर स्वत: रोक लगने का फैसला नहीं है।
H-1Bऔर PERM में फर्क
H-1B अस्थायी रोजगार वीजा है। PERM रोजगार-आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में श्रम विभाग का प्रमाणन है। अमेरिकी कदम PERM आवेदनों पर है।

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