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हरि बोल : वह ऐसे धार्मिक हुआ

डॉ. हरि जोशी

पिछले दिनों एक नाम सूरज की तरह प्रकाश पैâलाता सामने आया। इंजीनीयर रवि। कुछ साल पहले ही वह धार्मिक बना है। पहले वह घोर अधार्मिक था। कुछ भक्तों के घनिष्ट संपर्क में आने के बाद, उसने जब धन लाभ देखा तो कुछ समय बाद वह धार्मिक हो गया। उस तंत्र के मठाधीश का अनुभव था कि पैसा ही भगवान है। जो धन की पूजा करता है, वही सच्चा धार्मिक है। इस दिशा में अनेक ठेकेदार सक्रिय रहे हैं।
रवि भी एक झटके में धार्मिक बन गया। अब उसे गुप्त जानकारी भेजने की दक्षिणा मिलने लगी, बदले में वह अनेक गोपनीय जानकारियां दुश्मन देश को उपलब्ध कराने लगा।
शासकीय कार्यालयों में तो ऐसा धर्मावलंबी बना लेना आम बात है, किंतु सेना में हो जाना अत्यंत कठिन। रवि इंजीनियर की नौकरी बहुत पुरानी नहीं है, किंतु जल्दी ही उसने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया। जब उसने तंत्र में प्रवेश लिया था, तब वह अनाड़ी था। पहले, उस तंत्र में विद्यमान, रिश्वतीय धर्म के प्रकांड पंडितों ने उसकी मंशा टटोली।
-तुझे रिश्वत खाना अच्छा लगता है या नहीं?
उस पोंगेपंडित ने शुरू में तो मूर्खतापूर्ण उत्तर दिया ‘नहीं’।
-‘तब तो तू नालायक और घोर अधार्मिक है’।
‘भैया मेरी रूचि सीधे-सीधे ईमानदारी से काम करने में है, इधर-उधर भटकने में नहीं। मैं यहां-वहां कहीं भी मुंह नहीं मारूंगा।’ रवि बोला।
-क्या तुझे जानकारी नहीं है, हम लोगों ने वर्षों पहले से एक बढ़िया धार्मिक संगठन बना रखा है, जिसमें हम तुझे आदर सहित दीक्षित करना चाहते हैं। तू सूखी-सूखी तनख्वाह में जीवन यापन कर रहा है, मूर्ख है, इसीलिए कोई तुझे पूछ नहीं रहा, कोई तुझे पास नहीं बैठा रहा। हमारी तरह धार्मिक होते ही तेरी पूछ होने लगेगी। तू जैसे ही हमारी कीर्तन मंडली का सम्माननीय सदस्य बनेगा कि तेरा डंका बजने लगेगा। बस एक बार हां भर दे। हम तुझे हर तरह से सहायता करेंगे, ताकि तू धार्मिक होने के बाद निष्ठापूर्वक इसमें दीक्षित रहे, फिर नास्तिक नहीं रह सकता।’
रवि बोला- ‘इसके लिए मुझे क्या करना होगा? इसकी नियमावली के बारे में बताएं?’
-‘हम जैसा कहें वैसी सेना की गुप्त जानकारी बटोर कर रखना होगा और चुपके से हमें बताना होगा। जैसी जानकारी होगी, वैसी राशि मिलेगी। एक बार उच्च स्तरीय जानकारी दे दे, फिर देख हमारा जोड़-तोड़। विश्वास हो जाने पर हम एडवांस में अच्छी राशि देंगे और काम हो जाने के बाद तुझे मालामाल कर देंगे।’
भैया, मुझसे यह सब न हो सकेगा। रवि ने उस धार्मिक संगठन का सदस्य बनने में असमर्थता प्रकट की।
-तू अड़ियल घोड़ा मत बन, तुझे चारों दिशाओं से हितैषी घास डालने आएंगे। तू गोपनीय शाखा में है। सुंदर, सुडौल, गोल-मटोल घोड़ा बन जाएगा। तेरी इज्जत हम लोगों के बीच तो होगी ही, पाकिस्तान गलती से चला गया तो वे तुझे सर आंखों पर बैठाएंगे। तेरी पांचों अंगुलियां घी में और सिर कढ़ाई में होगा। इस तरह धार्मिक होने से तुझे लाभ ही लाभ मिलेंगे। तुझे बस यहां की कुछ गुप्त जानकारियां पाकिस्तान को भेजने में हमारी मदद करनी होगी, तेरे वारे-न्यारे हो जाएंगे। इस तरह तू जो अभी तक अधार्मिक था, अब पूरा धार्मिक हो जाएगा।’
और देखते ही देखते, एक अधार्मिक व्यक्ति धार्मिक हो गया।

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