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मोदी जी समझिए, समस्या खरीद में नहीं, कीमत में है!.. जो आपने और बढ़ा दी…

– सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन भी बढ़ोतरी

– आयातित सोना भी हुआ और महंगा

सामना संवाददाता / मुंबई

बाजार में सोना पहले से ही आम खरीदार की पहुंच से दूर होता जा रहा था। गहनों की दुकानों में भीड़ दिखती थी, लेकिन खरीदारी का वजन घट चुका था। लोग पहले जहां विवाह, त्योहार या निवेश के लिए खुलकर सोना खरीदते थे, वहीं अब कम वजन के आभूषण, पुराने सोने का विनिमय और जरूरत भर की खरीदारी पर आ गए थे। यानी सोने की मांग का असली चेहरा बदल चुका था, लोग सोना कम खरीद रहे थे, लेकिन महंगी कीमतों के कारण आयात बिल ज्यादा दिख रहा था। ऐसे में प्रधानमंत्री की अपील ने हालात और भी चिंताजनक कर दिए हैं।
भारत का सोना आयात बिल वित्त वर्ष २०२५-२६ में करीब ७२ अरब डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन मात्रा के हिसाब से आयात घटा था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में सोने का आयात, मात्रा में लगभग ४.७६ प्रतिशत घटकर ७२१.०३ टन रहा, जबकि कीमतों में तेज उछाल के कारण आयात बिल २४ प्रतिशत से अधिक बढ़ गया। यानी समस्या केवल ‘ज्यादा सोना खरीदने’ की नहीं, बल्कि ‘महंगा सोना खरीदने’ की भी थी। इसी बीच रुपये पर बढ़ते दबाव, तेल आयात का खर्च और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर चिंता बढ़ी। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत के पास अभी करीब ६९० अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है और आरबीआई जरूरत पड़ने पर लगभग १५० अरब डॉलर तक का उपयोग कर सकता है। यानी सावधानी की मांग जरूर करती है।
सोने की चमक में छिपा घाटे का गणित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक वर्ष तक सोना न खरीदने की अपील कर डाली। सरकार ने इसके बाद सोना और चांदी पर आयात शुल्क ६ प्रतिशत से बढ़ाकर १५ प्रतिशत कर दिया। उद्देश्य था, आयात घटाना, डॉलर बचाना और रुपए को सहारा देना। लेकिन बाजार पर इसका असर उलटा दिखाई दे रहा है। शुल्क बढ़ने के बाद सोने की घरेलू कीमतों में तेज उछाल आया है; रिपोर्टों के अनुसार एमसीएक्स पर सोना लगातार चढ़ रहा है, गोल्ड ईटीएफ करीब ५ प्रतिशत बढ़े हैं। और कई बड़े ज्वैलरी ब्रांडों ने २२ वैâरेट सोने के भाव में प्रति ग्राम सैकड़ों से हजार रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी है।
यहीं से सवाल उठता है, क्या जनता को संयम का संदेश देकर बाजार को शांति मिली या महंगाई का नया संकेत? उद्योग जगत का मानना है कि अपील से खरीदारी का व्यवहार बदल सकता है, लेकिन मांग पूरी तरह खत्म नहीं होगी। विवाह, परंपरा और निवेश इन तीनों कारणों से भारतीय परिवार सोने से अचानक दूरी नहीं बना सकते। इसलिए आज सोने का बाजार दोहरी विडंबना में फंसा है। जनता पहले ही कीमतों से दबकर कम सोना खरीद रही थी। लेकिन महंगे वैश्विक भावों ने आयात बिल बड़ा कर दिया। अब अपील और शुल्क वृद्धि के बाद बाजार में सोना और महंगा हो गया। यानी बचत का संदेश आया, पर ग्राहक के सामने कीमत का बोझ और बढ़ गया। घाटे का हिसाब बड़ा दिख रहा है, यही इस वक्त की असली कहानी है।

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