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मुस्लिम वर्ल्ड : सऊदी ने भी ईरान पर किया था हमला… अब खुली पोल!

सूफी खान

अभी तक यही माना जाता था कि ईरान ने अरब देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन अब पता चला है कि अमेरिका और इजरायल के साथ सऊदी अरब ने भी ईरान पर हमले किए थे। जहां एक तरफ यूएई खुलकर इजरायल के साथ है, लेकिन सऊदी अरब को इस मामले में अब तक ऐसा माना जा रहा था कि वो ईरान के हमलों का शिकार तो हुआ, लेकिन उसने पलट कर वार नहीं किया। वजह बताई जाती है कि सऊदी किसी भी तरह से क्षेत्रीय युद्ध नहीं चाहता। लेकिन अब पश्चिमी मीडिया की रिपोर्ट ही ये दावा कर रही है कि सऊदी अरब की वायुसेना ने मार्च २०२६ के आखिर में ईरान पर कई सीक्रेट हवाई हमले किए थे। अमेरिकी न्यूज एजेंसी अमेरिका और ईरानी अधिकारियों के सूत्र के हवाले से रिपोर्ट जारी करती है कि सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों और प्रॉपर्टी पर हुए हमलों के जवाब में ईरान पर अटैक किया था। अब तक सऊदी अरब ने कभी भी ये बात नहीं मानी थी, लेकिन पहली बार ये तथ्य सामने आया है कि ईरान पर सऊदी अरब ने भी जमीनी हमले किए थे।
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ईरान पर कुछ हमले अंजाम देनें के बाद सऊदी को जल्द ही समझ में आ गया कि अगर जंग बेकाबू हुई तो नुकसान बहुत बड़ा होगा। क्षेत्रीय युद्ध हुआ तो इसका सीधा फायदा इजरायल उठा लेगा। इसलिए सऊदी ने ईरान पर कुछ हमले करने के बाद हमला करना बंद कर दिया और ईरान ने भी सऊदी पर अप्रैल में अटैक करीब-करीब बंद कर दिया। ये ईरान और सऊदी की एक-दूसरे पर भरोसे की राजनीति नहीं थी, बल्कि मजबूरी थी। वजह वही इलाकाई जंग थी, जिससे दोनों बचना चाहते हैं।
एक्सपर्ट कहते हैं कि सऊदी अरब ने ईरान पर हमले तो किए, लेकिन साथ में बातचीत का माहौल भी बनाए रखा यानी चुप्पा खेल खेला जा रहा था। मार्च महीने में इजरायल-अमेरिका के बेतहाशा हमलों को देख अरब मुल्कों को लगा कि ईरान तो गया। लेकिन जब ईरान हावी होने लगा तो उन्होने ईरान से बातचीत का रास्ता अपनाए रखा,लेकिन अंदर से वो अमेरिका का साथ दे रहे थे। यूएई बहरीन और कुवैत तो खुल कर इजरायल की मदद कर रहे थे और इजरायल उनकी। यही वजह रही कि अप्रैल मे ईरान ने सऊदी पर सीधे हमले कम कर दिए, लेकिन ईरान के प्रॉक्सी अब भी सऊदी के पीछे पड़े हैं। चाहे वो यमन के अंसारुल्लाह या हूती हों या फिर इराक में मौजूद ईरान हिमायती ग्रुप्स। खास बात ये है कि सऊदी और ईरान के बीच बरसों से खराब रिश्ते साल २०२३ में चीन की मध्यस्थता में सुधरे थे। लेकिन ४० दिनों की जंग ने दिखा दिया कि दोनों इस्लामिक मुल्कों के बीच यकीन नाम की कोई चीज नहीं है। दोनों खुली जंग से तो बचना चाहते हैं, लेकिन अंदर से एक दूसरे को जरा भी पसंद नहीं करते।

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