रवीन्द्र मिश्रा / मुंबई
वैष्णव परंपरा में श्रावण एवं भाद्रपद मास में झूलनोत्सव (हिंडोला) का विशेष महत्व बताया गया है। मथुरा, वृंदावन तथा बरसाना में भगवान श्रीकृष्ण तथा राधा रानी को फूलों से बने हिंडोला में बिठा कर उन्हें झुलाया जाता है। इसी तर्ज पर दक्षिण मुंबई स्थित महालक्ष्मी के त्र्यंबकेश्वर मंदिर प्रांगण में रणछोड़ दास यानि भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में इस झूलनोत्सव का आयोजन किया गया है। तुलसीदास गोपाल जी चैरिटेबल एंड धाकलेश्वर मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक दत्ता कोठावले ने बताया कि 30 जुलाई से शुरू हुआ यह झूलनोत्सव 29अगस्त तक चलेगा। शाम 4 बजे से रात साढ़े 8 बजे तक चलने वाले इस झूलनोत्सव में भक्तों की अच्छी खासी भीड़ इकट्ठा हो रही है। मंदिर पुजारी पंडित गजेंद्र महाराज इस झूलनोत्सव के महत्व को बताते हुए कहते हैं कि यह प्रकृति का स्वागत तथा धार्मिक उत्साह का प्रतीक है। यह हमें जीवन के उतार चढ़ाव में तालमेल बिठाने की शिक्षा देता है। वर्षा ऋतु आने पर ठंडी ठंडी हवाएं जीवन के हर पल को आनंदित करने की प्रेरणा देती हैं। रणछोड़ दास के इस मंदिर में भक्त चांदी, सोना, नारियल, कौड़ी, गन्ना,संतरा, तुलसी,पंचरंगी जरी, सुपारी, कांच, कमल का फूल, गुलछडी,गुलाब का फूल, सब्जी, फल इलायची राजमुद्रा सहित अन्य सामग्री से तैयार किए गए झूले पर भगवान को बिठा कर उन्हें झूलाते हैं। वैष्णव भक्तों का मानना है कि यह झूलनोत्सव उनके सभी मुरादें पूरी करता है।
