मुख्यपृष्ठस्तंभहनीफनामा : फुटपाथ से फिल्मी दुनिया तक हसरत जयपुरी

हनीफनामा : फुटपाथ से फिल्मी दुनिया तक हसरत जयपुरी

हनीफ जवेरी

फिल्म जगत प्रतिभाशाली लोगों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है, बशर्ते किस्मत उनका साथ दे। कुछ प्रतिभाशाली लोग खुद संघर्ष करके फिल्म जगत में आते हैं और कुछ को उनकी किस्मत खींच लाती है! गीतकार हसरत जयपुरी भी किस्मत के धनी थे। उन्हें भी उनकी किस्मत इस उद्योग में खींच लाई थी।
१५ अप्रैल १९२२ को इकबाल हुसैन उर्फ हसरत जयपुरी का जन्म राजस्थान में फौजी नाजिम हुसैन और फिरदौसी बेगम के घर पहली संतान के रूप में हुआ था। उनके दोनों भाई मुमताज हुसैन और इकराम हुसैन उनकी दोनों बहनों जुबैदा और बिलकिस उनसे छोटे थे।
आगे चलकर बिलकिस की शादी संगीतकार सरदार मलिक से हुई, जो संगीतकार अनु मलिक की मां हैं, दूसरी बहन जुबैदा की बहू आज की अभिनेत्री मौली गांगुली हैं।
हसरत को लिखने की कला अपने नाना और मशहूर शायर फिदा हुसैन फिदा की संगत से मिली थी। पिता नाजिम की मृत्यु के बाद हसरत ज्यादातर अपने नाना के साथ रहने लगे, जो उनकी मां को पसंद नहीं था, क्योंकि वह हसरत को पढ़ाना चाहती थीं और एक रोज गुस्से में आकर मां ने १८ वर्षीय हसरत को घर से ही निकाल दिया। इसके बाद हसरत मुंबई आ गए। गुजारा करने के लिए वे फुटपाथ पर खिलौने बेचते और रात में वहीं सो जाते। लेकिन किसी की सलाह पर उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया और वे बस कंडक्टर बन गए।
लेकिन शेर-ओ-शायरी करना हसरत का शौक था और उर्दू तथा फारसी भाषा पर उनका अच्छा कमांड था। लिहाजा वे उन दिनों होने वाले मुशायरों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करते थे। यही नहीं, बस कंडक्टर की ड्यूटी निभाते हुए भी वे खूबसूरत लड़कियों को देखकर कोई न कोई शेर सुना देते और उनसे प्रभावित होकर उनका टिकट भी नहीं काटते थे।
हसरत रोमांटिक होने के साथ-साथ भावुक और संजीदा भी थे। जिस फुटपाथ पर वे रात गुजारते, उसी फुटपाथ पर एक मजदूर ने दम तोड़ दिया। उस मजदूर की लाश देखकर वे इतने भावुक हो गए कि रोते हुए उस पर एक कविता लिख दी, जिसका शीर्षक ‘मजदूर की लाश’ था।
यही कविता उन्होंने एक मुशायरे में सुनाई, जहां संयोग से अभिनेता पृथ्वीराज कपूर मौजूद थे। कविता सुनकर पृथ्वीराज भी भावुक हो गए और उन्होंने हसरत को अपने घर आने का निमंत्रण दिया और अपने बेटे राज कपूर से मिलवाया, जो फिल्म बरसात बनाने जा रहे थे राज ने उनसे उनकी कुछ रचनाएं सुनीं और फिल्म ‘बरसात’ के गीतों की परिस्थितियां देकर उन्हें गीत लिखने को कहा। जबकि गीतकार शैलेंद्र भी बरसात के लिए गाने लिख रहे थे और यहीं से हसरत की किस्मत बदल गई।
अब शंकर-जयकिशन, शैलेंद्र, हसरत और राज की एक टीम बन गई। लेकिन बरसात करते समय हसरत ने बस कंडक्टर की नौकरी जारी रखी, वे नौकरी भी २–३ साल तक करते रहे। बाद में राज के दबाव देने पर उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
१९५३ में हसरत का कानपुर की बिलकीस से अरेंज मैरिज हुआ। इससे पहले उनकी सगाई हास्य अभिनेता महमूद की बहन खैरुन्निसा से हुई थी, जो तीन महीने में ही टूट गई।
हसरत ने कई फिल्मों के लिए गाने लिखे, लेकिन यह उनका दुर्भाग्य रहा कि जिस राज कपूर ने उनकी कला को पहचाना था और अपनी अंतिम फिल्म राम तेरी गंगा मैली के लिए भी उनसे गाने लिखवाए थे, उसी राज कपूर के बेटे रणधीर कपूर ने फिल्म हिना से हसरत का वह गीत हटा दिया, जिसे खुद राज कपूर ने पहले ही रिकॉर्ड करवाया था क्योंकि राज कपूर के निधन के बाद हिना की कमान रणधीर के हाथ में आ गई थी।
खैर, लंबी उम्र पाने के बाद हसरत १७ सितंबर १९९९ को इस दुनिया से रुखसत हो गए।

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