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विधायक बनकर गलती कर दी…अधिकारी सुनते नहीं, फंड मिलता नहीं!.. सरकार की बदहाली पर भाजपा के परिणय फुके का छलका दर्द

सामना संवाददाता / मुंबई

राजनीति में सक्रिय हर कार्यकर्ता का सपना विधायक बनने का होता है। कुछ लोगों को यह मौका विधानसभा चुनाव के जरिए मिलता है तो कुछ बिना चुनाव लड़े विधान परिषद के जरिए अपना सपना पूरा कर लेते हैं। लेकिन अगर यही विधायक सरकार के कामकाज के तरीके से परेशान हो जाएं और सरकार की बदहाली पर दुखड़ा रोएं तो आप समझ सकते हैं कि सरकार किस दिशा में जा रही है। सत्ताधारी विधायक ने ही सरकार के कामकाज को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी विधायक परिणय फुके ने गंभीर आरोप लगाए हैं। फुके ने कहा कि विधान परिषद के सदस्यों की अनदेखी की जाती है। सदन में मंत्री नहीं आते, अधिकारी मौजूद नहीं रहते हैं। विधान परिषद के सदस्यों को विकास निधि नहीं दी जाती है। सार्वजनिक निर्माण विभाग से निधि मांगी जाती है तो सवाल किया जाता है कि क्यों चाहिए? सरकार के पास फंड नहीं, अधिकारियों को वक्त नहीं, मंत्री साहब मिलते नहीं, हमने विधायक बनकर गलती कर दी है।
फिलहाल, विधानमंडल का मानसून सत्र चल रहा है और यह अलग-अलग कारणों से चर्चा में है। हर सत्र में विपक्ष की ओर से यह आरोप लगाया जाता है कि उन्हें निधि नहीं दी जाती, यह आरोप इस सत्र में भी लगाया गया है। लेकिन साथ ही साथ विधान परिषद और उसके सदस्यों को सरकार गंभीरता से नहीं ले रही, ऐसा आरोप सत्ता पक्ष के ही विधायक परिणय फुके ने लगा डाला, जिससे एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
फुके के इस बयान की राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। क्या विधान परिषद केवल औपचारिकता के लिए रह गई है? ऐसा सवाल उठाया जा रहा है। अगर सत्ता पक्ष के ही सदस्य ऐसा कह रहे हैं, तो विपक्ष की शिकायतों को वजन मिलना स्वाभाविक है।

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