सुरेश गोलानी / भायंदर
२९ सितंबर २०१७ को एल्फिंस्टन रोड ब्रिज पर हुई भगदड़ के बाद मुंबई हाई कोर्ट ने मुंबई मनपा को जमकर लताड़ते हुए आदेश जारी किए थे कि रेलवे स्टेशनों से १५० मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार के फेरीवाले नहीं होने चाहिए, लेकिन हाई कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए शहर में फेरीवालों का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है।
मीरा रोड रेलवे परिसर को निशाना बनाने के बाद अवैध फेरीवालों ने मीरा भायंदर महानगरपालिका और रेलवे पुलिस प्रशासन के आशीर्वाद से स्काईवॉक के दोनों ओर अपना कब्जा जमाकर उसे एक मिनी शॉपिंग सेंटर में तब्दील कर दिया है। स्थिति यह बनी हुई है कि स्काईवॉक पर रेल यात्रियों को चलने के लिए नाम मात्र जगह शेष है। स्काईवॉक पर अवैध कब्जे के अलावा इन फेरीवालों ने रेलवे परिसर में गंदगी और बदबू का साम्राज्य पैâला के रखा है। खुलेआम चल रहीं इन अवैध गतिविधियों को देखकर भी प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता सजी आईपी के अनुसार उच्च न्यायालय के प्रतिबंध के बावजूद रेलवे स्टेशन के १५० मीटर परिधि में खुलेआम फेरी लगाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। इससे प्रशासन की मिलीभगत साफ तौर पर साबित होती है। अपने कर्तव्य का पालन नहीं करने और जानबूझकर न्यायालय के आदेशों का अनादर करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
वसूली माफियाओं का संरक्षण
सूत्रों के अनुसार, इन अवैध धंधों को वसूली माफियाओं का संरक्षण प्राप्त है जो फेरीवालों से नियमित हफ्ता इकट्ठा करते हैं, जिसका कुछ हिस्सा कथित रूप से प्रशासन में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों और स्थानीय नेताओं की जेबों में जाता है। आरोप है कि मनपा द्वारा नियुक्त ठेकेदार को शुल्क देने के अलावा, हर फेरीवाले को सार्वजनिक स्थानों पर अपना विक्रय व्यवसाय चलाने के लिए संगठित वसूलीबाजों को हर महीने ५,००० से १०,००० रुपए देने होते हैं। ज्ञात हो कि इसी कथित हफ्ता वसूली के विवाद में ३ दिसंबर २०२५ की रात को ३५ वर्षीय चश्मा बेचने वाले फेरीवाले की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
