मुख्यपृष्ठसमाचारसीधी बात: हादसों के शहर में दोषियों को प्रशासनिक सुरक्षा कवच!

सीधी बात: हादसों के शहर में दोषियों को प्रशासनिक सुरक्षा कवच!

सुरेश गोलानी

-कहीं पेड़ गिरने से, कहीं क्रेन टूटने से और कभी हिट-एंड-रन की घटनाओं में मासूम नागरिकों की हो रहीं दर्दनाक मौतें

मीरा-भायंदर शहर तेजी से हादसों का शहर बनता जा रहा है। जानलेवा साबित होने वाली इन घटनाओं के बाद अक्सर देखा गया है कि कार्रवाई करने के बजाय मीरा-भायंदर महानगरपालिका, पुलिस प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियां हादसों के जिम्मेदार, लेकिन रसूखदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने के बजाय उन्हें प्रशासनिक सुरक्षा कवच मुहैया कराने में व्यस्त नजर आती हैं।
३० जून को भायंदर पश्चिम स्थित राई गांव में सड़क किनारे खड़े एक नारियल का पेड़ अचानक एक बाइक पर गिर गया, जिससे राहुल पाटिल नामक ३३ वर्षीय युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। ३ जुलाई को एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। आरोप है कि वृक्ष प्राधिकरण विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की लापरवाही के कारण मानसून से पहले खतरनाक और जर्जर पेड़ों की समय पर तथा वैज्ञानिक ढंग से छंटाई नहीं की गई, जिसके चलते यह हादसा हुआ। कार्रवाई शून्य।
न तो लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई हुई। नतीजा यह रहा कि शहर के कई इलाकों में बाद में भी पेड़ गिरने की घटनाएं हुईं, जिनमें एक नगरसेवक भी घायल हो गए। १६ जुलाई को मीरा रोड के विनय नगर स्थित जेपी नॉर्थ कॉम्प्लेक्स में निर्माणाधीन टावर की ११वीं मंजिल से एक विशाल क्रेन गिरने से २४ वर्षीय मोहम्मद मुज्जमिल खोखर की दर्दनाक मौत हो गई। फिर कार्रवाई शून्य। घटना के कई दिन बाद भी पुलिस ने इस गंभीर मामले में बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की। सूत्रों के अनुसार, आक्रोशित नागरिकों की मांग और आंदोलन के बावजूद प्रशासन ने ताकतवर बिल्डर की इस कथित जानलेवा लापरवाही को अनदेखा कर दिया और कानूनी खामियों (लूपहोल) का लाभ उठाते हुए पूरा ठीकरा ठेकेदार पर फोड़ने की कवायद शुरू कर दी।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, निर्माण स्थलों या सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले ऐसे हादसों के लिए मुख्य नियोक्ता (चाहे वह बिल्डर हो या मनपा प्रशासन) को भी कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। केवल ठेकेदार या सुपरवाइजर पर पूरा दोष मढ़कर अपनी जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। दोषियों को इस प्रकार का अनुचित संरक्षण मिलने से न्याय प्रक्रिया की खुलेआम धज्जियां उड़ती हैं और अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जाते हैं।

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