– मुंबई से खुला ‘ओटीपी फार्मिंग’ का खेल
– भारतीय नंबरों से विदेशी ठग बना रहे फर्जी व्हॉट्सऐप खाते
सामना संवाददाता / मुंबई
भारत के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का एक संगठित कारोबार सामने आया है। इसे ‘ओटीपी फार्मिंग’ कहा जा रहा है। एक अंग्रेजी अखबार की खोजी रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि भारतीय सिम कार्ड, सत्यापन कोड और सक्रिय व्हाट्सऐप खातों की आपूर्ति कथित तौर पर दक्षिण-पूर्व एशिया के साइबर अपराध नेटवर्क को की जा रही है। इस व्यवस्था में बड़ी संख्या में सिम कार्ड जुटाकर उनके माध्यम से व्हॉट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर खाते सक्रिय किए जाते हैं। फिर इन खातों या सत्यापन कोड को विदेशों में मौजूद संचालकों तक पहुंचाया जाता है।
सितंबर २०२६ में मुंबई पुलिस ने ऐसे ही एक कथित गिरोह के तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से ६६९ सक्रिय सिम कार्ड और १०० मोबाइल फोन बरामद हुए थे। पुलिस को संदेह था कि इन नंबरों से जुड़े सत्यापन कोड कंबोडिया के संचालकों को भेजे जा रहे थे। एक अन्य मामले में मई २०२६ के दौरान मुंबई पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में सैकड़ों सिम कार्ड और विदेशों में संचालित कथित साइबर धोखाधड़ी से संबंध सामने आए थे।
ऐसे भारतीय मोबाइल नंबरों के जरिए ठग निवेश, डिजिटल गिरफ्तारी और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए पीड़ितों से संपर्क कर सकते हैं। सबसे गंभीर सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में सिम कार्ड किन पहचान दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए और उनकी निगरानी कैसे हुई? दूरसंचार विभाग ने एक जनवरी २०२७ से मैसेजिंग ऐप के लिए सिम-बाइंडिंग व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं।
