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एमएमआर में पानी का हाहाकार!

– कहीं १५ प्रतिशत कटौती, कहीं ३६ घंटे नल बंद!
– नई मुंबई से मीरा-भायंदर तक पानी की किल्लत
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के कई शहरों में पानी की किल्लत ने नागरिकों की परेशानी बढ़ा दी है। नई मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, भिवंडी, मीरा-भायंदर, वसई-विरार और पनवेल में जलापूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है। कहीं पानी की कटौती लागू है, तो कहीं लंबे शटडाउन और कम आपूर्ति के कारण लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नई मुंबई : खारघर से उलवे तक
पानी में १५ प्रतिशत कटौती
सिडको ने दो नवंबर से अपने अधीन आने वाले क्षेत्रों में १५ प्रतिशत पानी कटौती लागू करने की घोषणा की है। खारघर, न्यू पनवेल, उलवे, कलंबोली और कामोठे सहित विभिन्न इलाकों में निर्धारित दिनों पर जलापूर्ति बंद रहने या एक दिन छोड़कर पानी मिलने की व्यवस्था बताई गई है।
कल्याण-डोंबिवली : नदी में पानी घटा, शटडाउन ने बढ़ाई चिंता
उल्हास नदी का जलस्तर गिरने से मोहने पंपिंग स्टेशन की जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। इसी बीच एमआईडीसी की प्रस्तावित ३६ घंटे की बंदी ने चिंता बढ़ाई है। केडीएमसी प्रशासन ने बंदी की अवधि कम करने और नदी में अतिरिक्त पानी छोड़ने की मांग की है।
भिवंडी : प्रतिदिन ६.५ करोड़ लीटर पानी का घाटा
भिवंडी को प्रतिदिन लगभग १८ करोड़ लीटर पानी की आवश्यकता है, जबकि उपलब्ध आपूर्ति करीब ११.५ करोड़ लीटर बताई गई है। इस तरह रोज लगभग ६.५ करोड़ लीटर पानी की कमी है। कई कुएं और हैंडपंप अनुपयोगी होने से परेशानी बढ़ी है।
मीरा-भायंदर : दो एजेंसियों की
साप्ताहिक बंदी, पानी का हिसाब बिगड़ा
मीरा-भायंदर महानगरपालिका ने दस प्रतिशत पानी कटौती के साथ एसटीईएम और एमआईडीसी की साप्ताहिक बंदी की जानकारी दी है। एसटीईएम से बुधवार सुबह नौ बजे से गुरुवार तड़के तीन बजे तक १८ घंटे तथा एमआईडीसी से शुक्रवार मध्यरात्रि से शनिवार दोपहर १२ बजे तक ३६ घंटे आपूर्ति बंद रहने का कार्यक्रम है। अलग-अलग स्रोतों की इन बंदियों से शहर की जलापूर्ति प्रभावित होगी।
वसई-विरार : कटौती पर मंथन,
अंतिम फैसला अभी बाकी
वसई-विरार महानगरपालिका ने प्रस्तावित दस प्रतिशत पानी कटौती का अध्ययन करने के लिए सर्वदलीय समिति गठित की थी। पुराने कुओं और जलस्रोतों के पुनरुद्धार पर भी विचार हुआ है। हालांकि, कटौती लागू करने के अंतिम आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।
पनवेल : निर्माणाधीन इमारतों को
पीने का पानी नहीं
पनवेल महानगरपालिका ने जलसंकट के बीच निर्माणाधीन इमारतों को नए पेयजल कनेक्शन नहीं देने का पैâसला किया है। इससे सौ से अधिक निर्माण परियोजनाएं प्रभावित होने की रिपोर्ट है। प्रशासन का उद्देश्य उपलब्ध पानी को नागरिकों की आवश्यक जरूरतों के लिए सुरक्षित रखना है। अब सवाल केवल पानी बचाने का नहीं, बल्कि बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त जलस्रोत तैयार करने का भी है। नई मुंबई महानगरपालिका ने भी ३ नवंबर को सुबह १० से रात ८ बजे तक मोरबे जलापूर्ति नेटवर्क के रखरखाव के लिए दस घंटे का शटडाउन घोषित किया है।

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