मुख्यपृष्ठनए समाचारबदहाल है बुनियादी सुविधाएं!..कागजी दावों पर मुंबई मेयर की १०० दिवसीय योजना...

बदहाल है बुनियादी सुविधाएं!..कागजी दावों पर मुंबई मेयर की १०० दिवसीय योजना करदाताओं के पैसे की सुरक्षा पर मंडराया खतरा

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबईकरों को एक बार फिर सुनहरे सपनों का झुनझुना थमा दिया गया है। मुंबई मेयर द्वारा गाजे-बाजे के साथ घोषित की गई १०० दिवसीय योजना धरातल पर पूरी तरह से धराशायी हो चुकी है। सच तो यह है कि यह योजना विकास का कोई खाका नहीं, बल्कि केवल कागजी दावों का एक पुलिंदा है, जिसका जमीनी हकीकत से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। योजना के तहत किए गए बड़े-बड़े वादे चाहे वह गड्ढामुक्त सड़कें हों, जलभराव से मुक्ति हो या प्रशासनिक पारदर्शिता, सिर्फ फाइलों और प्रेस कॉन्प्रâेंस तक ही सीमित रह गए हैं।
धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन की इस घोर निष्क्रियता ने यह साफ कर दिया है कि यह पूरी योजना सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट थी, जिसका मकसद असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना था। बिना किसी ठोस रणनीति और जवाबदेही के, करोड़ों रुपए के फंड आवंटित कर दिए गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह पैसा विकास कार्यों में लगने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।
करदाताओं का पैसा असुरक्षित
जनता के खून-पसीने की कमाई अब पूरी तरह से असुरक्षित हाथों में है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना में कोई ऑडिट ट्रेल या पारदर्शिता नहीं है, जिससे वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा चरम पर पहुंच गया है। जिस पैसे का उपयोग मुंबई के जर्जर बुनियादी ढांचे को सुधारने में होना चाहिए था, उसे केवल विज्ञापनों और खोखली बैठकों में फूंक दिया गया है। यह योजना मुंबई की जनता के साथ एक क्रूर मजाक है। जब बुनियादी सुविधाएं ही गायब हैं, तो मानपा किस बात का जश्न मना रहे हैं?

अन्य समाचार