मुख्यपृष्ठनए समाचारनिवेशकों में भागमभाग ... बाजार से विदेशियों ने किए रु. ३५,००० करोड़...

निवेशकों में भागमभाग … बाजार से विदेशियों ने किए रु. ३५,००० करोड़ विड्रो!

-मोदी की कमजोर आर्थिक नीतियों का साइड इफेक्ट
-अब तक `१.३ लाख करोड़ की हो चुकी है निकासी
सामना संवाददाता / मुंबई
मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के साइड इफेक्ट नजर आने लगे हैं। हिंदुस्थान की अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेशकों का विश्वास कम होने लगा है। वे भारतीय बाजार से तेजी से निकासी कर रहे हैं। बाजार से मिली रिपोर्ट के अनुसार, गत अगस्त महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब ३४,९९३ करोड़ (लगभग ४ अरब डॉलर) रुपए विड्रो किए। यह पिछले छह महीनों की सबसे बड़ी बिकवाली रही। इसकी वजह अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर भारी टैरिफ लगाना और घरेलू बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन बताए जा रहे हैं।
बता दें कि गत जुलाई में जहां १७,७४१ करोड़ रुपए की निकासी हुई थी, वहीं अगस्त में यह लगभग दोगुनी रही। इससे अब तक इस साल २०२५ में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कुल इक्विटी निकासी १.३ लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गई है।

बाहर के बाजार सस्ते हैं
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी. के. विजय कुमार के अनुसार, ‘भारत में शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन की तुलना में दूसरे बाजार सस्ते हैं। यही वजह है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारत से पैसा निकालकर अन्य बाजारों में लगाया।’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक अब भी प्राइमरी मार्वेâट में खरीदारी कर रहे हैं।

टैरिफ का बुरा असर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह निकासी घरेलू और वैश्विक दोनों कारकों का नतीजा है। फरवरी के बाद यह सबसे बड़ी बिकवाली रही है, जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने ३४,५७४ करोड़ रुपयों के शेयर बेचे थे। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट के हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ‘अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर ५० फीसदी तक के टैरिफ ने निवेशकों की धारणा पर बुरा असर डाला। इससे भारत की व्यापार प्रतिस्पर्धा और विकास संभावनाओं पर चिंता बढ़ी। इसके अलावा, जून तिमाही के नतीजों में कुछ अहम सेक्टर उम्मीद पर खरे नहीं उतरे, जिससे निवेशकों का रुझान और कमजोर हुआ।’

अन्य समाचार