मुख्यपृष्ठखबरेंगजबे है : मोदी का `प्रचार' हम से ना हो पाएगा..!

गजबे है : मोदी का `प्रचार’ हम से ना हो पाएगा..!

-उमा सिंह

आजकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘जेन-जी’ कुछ ऐसी भा गई है कि मौका मिलते ही उसका जिक्र छेड़ देते हैं। कभी इंस्टाग्राम पर लाइव होकर युवाओं से बतियाते हैं, तो कभी ‘मन की बात’ में जेन-जी को नसीहत और संवाद का डोज देते नजर आते हैं। लगता है कि देश की राजनीति में ‘मन की बात’ के बाद अब जल्द ही ‘जेन-जी की बात’ भी सुनाई देने लगेगी। लेकिन यहां मामला थोड़ा उल्टा दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री की बातों में जेन-जी भले ही खूब नजर आ रहे हों, लेकिन जेन-जी की आवाज में प्रधानमंत्री की बातें उतनी सुनाई नहीं दे रही हैं। तभी तो देश के अलग-अलग हिस्सों से युवाओं के विरोध के स्वर सामने आ रहे हैं। इसी बीच कोलकाता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज का मामला चर्चा में है। यहां जेन-जी ने मोदी को साफ संदेश दे दिया, ‘नहीं मोदी का प्रचार, हमसे न हो पाएगा।’
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन के २५ वर्ष पूरे होने के कार्यक्रमों के तहत शिक्षण संस्थानों में ‘नमो सेवा’ नामक नाटक प्रस्तुत किया जाना था। रिपोर्टों के मुताबिक, कॉलेज के कुछ छात्रों ने इसमें हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। छात्रों की आपत्ति राजनीतिक संदेश और अपनी इच्छा के खिलाफ मंच पर उतरने को लेकर थी। नाटक में मोदी की उपलब्धियों का सकारात्मक चित्रण किया जाना था। छात्रों ने सवाल उठाया कि थिएटर में अभिनय अपनी पसंद से होगा या किसी राजनीतिक संदेश के लिए? बस फिर क्या था, यहीं से मामला गरमा गया। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि इनकार करने पर आंतरिक अंक और परियोजना पर असर पड़ने की बात कही गई। हालांकि, कॉलेज की प्रिंसिपल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी को मजबूर नहीं किया गया और भागीदारी स्वैच्छिक थी। वैसे सियासत कभी-कभी ये भूल जाती है कि जेन-जी को आदेश से ज्यादा ‘ऑप्शन’ पसंद हैं। उसे मंच दिया जाए तो वह सवाल पूछेगा। और अगर उससे कहा जाए कि बस संवाद बोलो, तो उनका अगला सवाल यही होगा, `क्यों और कायको?’

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