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वोटर लिस्ट पर सवाल उठाए तो जेल!..कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं की हिरासत बढ़ी

-अपराध शाखा को सौंपा गया मामला
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठे विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत ने राजधानी की राजनीति में नया सवाल खड़ा कर दिया है। चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर में कथित अनधिकृत प्रवेश से जुड़े मामले को आगे की जांच के लिए अपराध शाखा की अंतरराज्यीय इकाई को सौंप दिया। अब मामला केवल दो नेताओं की हिरासत तक सीमित नहीं है; बहस इस बात पर भी है कि विरोध-प्रदर्शन, सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे कायम होगा।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, फिर हिरासत
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, १३ अक्टूबर को सीजेपी नेताओं समेत १४ लोगों का एक समूह कथित तौर पर बैरिकेड पार कर जंतर-मंतर के उस क्षेत्र में पहुंचा, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाया जा चुका था। समूह ने तिरंगा फहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लोगों को हिरासत में लिया। बाद में सौरव दास और आशुतोष रांंका को तिहाड़ जेल भेजा गया।
सौरव-आशुतोष की रिहाई के लिए हाई कोर्ट पहुंचीं रत्ना सिंह
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। पार्टी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए याचिका दायर की है। उन्होंने अदालत से रात में ही तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया है। रत्ना सिंह का कहना है कि दोनों नेताओं की स्वतंत्रता पर इस तरह रोक नहीं लगाई जानी चाहिए और न्याय मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए।
अभिजीत दीपके ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह का जिक्र करते हुए आंदोलन में धैर्य और दृढ़ संकल्प के महत्व को रेखांकित किया। उनके संदेश में यह भाव प्रमुख रहा कि जेल और दूसरी मुश्किलें किसी आंदोलन के उद्देश्य को समाप्त नहीं कर सकतीं।

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