अनिल मिश्र / रांची
उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ हवन-यज्ञ एवं गंगाजल छिड़काव के मामले को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक आज रांची स्थित अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति थाना पहुंचे और थाना प्रभारी को लिखित आवेदन सौंपकर जीरो एफआईआर दर्ज करने की मांग की।विजय शंकर नायक ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी अनुसूचित जाति के नेता की जातिगत पहचान अथवा उपस्थिति के कारण सार्वजनिक स्थल को ‘अपवित्र’ मानकर उसका शुद्धिकरण कराया गया, तो यह महज राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि जातिगत अपमान, भेदभाव और सामाजिक समानता के संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न है। उन्होंने अपने आवेदन में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989, Protection of Civil Rights Act, 1955 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत जांच एवं कार्रवाई की मांग की है। साथ ही 8–10 अगस्त की CCTV फुटेज, वीडियो, फोटो, सोशल मीडिया सामग्री तथा कार्यक्रम से जुड़े दस्तावेजों को तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की है।इस बीच नायक ने कहा—“सवाल यह है कि आखिर किस आधार पर एक दलित नेता की मौजूदगी के बाद सार्वजनिक स्थल का कथित शुद्धिकरण किया गया? यदि यह जातिगत सोच का परिणाम था, तो इसकी निष्पक्ष कानूनी जांच जरूरी है। संविधान में अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है।” उन्होंने कहा कि घटना उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई है, इसलिए रांची में प्राप्त शिकायत को जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज कर संबंधित पुलिस थाना, हल्द्वानी को भेजा जा सकता है। उन्होंने पुलिस से मामले में उपलब्ध सभी डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग की।
विजय शंकर नायक ने अनुसूचित जाति /जनजाति थाना प्रभारी से मांग की कि उनके द्वारा दिए गए आवेदन पर तत्काल जीरो एफआईआर दर्ज कर संबंधित थाना क्षेत्र को प्रेषित किया जाए, वहीं पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध एससी/एसटी कानून सहित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल श्री खरगे जी के सम्मान का प्रश्न नहीं है, बल्कि दलित सम्मान, सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा का सवाल है।विजय शंकर नायक ने स्पष्ट कहा कि “जाति के नाम पर अपमान और भेदभाव की मानसिकता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संविधान ने हर नागरिक को समान सम्मान और अधिकार दिया है। संविधान और दलित सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रहेगी।”
