-सांसद अरविंद सावंत का विद्वानों से आह्वान; शिवसेना अपंग सहाय्य सेना की ओर से पीएचडीधारकों का भव्य सम्मान
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र को विभिन्न समस्याओं और कष्टों से मुक्त करने के लिए विद्वानों को अपने ज्ञान, अनुभव और शोध का उपयोग समाज के कल्याण हेतु करना चाहिए। पीएचडी जैसी उच्च शैक्षणिक उपाधि प्राप्त करने वाले बुद्धिजीवी केवल अपनी उपलब्धियों तक सीमित न रहें, बल्कि महाराष्ट्र को क्लेशमुक्त बनाने के लिए भी आगे आएं। यह अपेक्षा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता एवं सांसद अरविंद सावंत ने व्यक्त की।
नवरात्रोत्सव के पावन अवसर पर देवी की आरती में हम ‘क्लेशों से मुक्ति दिलाओ और सांसारिक बंधनों को तोड़ो’ की प्रार्थना करते हैं। इसी भाव का उल्लेख करते हुए सावंत ने कहा कि महाराष्ट्र के कष्टों और समस्याओं को दूर करने के लिए पीएचडीधारक विद्वानों को अपने ज्ञान का उपयोग करना चाहिए। समाज के सामने उपस्थित चुनौतियों का समाधान खोजने में उनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण हो सकती है।
हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजन
हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शिवसेना अपंग सहाय्य सेना की ओर से मुंबई मराठी पत्रकार संघ के लोकमान्य सभागार में पीएचडी की उपाधि प्राप्त विद्वानों के सम्मान में भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं शिवसेना नेता सांसद अरविंद सावंत के हाथों सभी सम्मानित व्यक्तियों का अभिनंदन किया गया।
इस समारोह में अपने विचार व्यक्त करते हुए सावंत ने कहा कि पीएचडीधारकों की विद्वत्ता और उपलब्धियों का सम्मान करना गौरव की बात है। उन्होंने इस अवसर को अपने लिए अत्यंत सौभाग्यपूर्ण बताते हुए सम्मानित विद्वानों के योगदान की सराहना की।
संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के अग्रणी नेता एवं महान समाजसुधारक केशव सीताराम ठाकरे, जिन्हें प्रबोधनकार ठाकरे के नाम से जाना जाता है, हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे तथा मराठी पत्रकारिता के प्रमुख समाचारपत्र दैनिक ‘सामना’ की वैचारिक परंपरा का उल्लेख भी इस अवसर पर किया गया।
पीएचडीधारकों का सम्मान, अंध विदुषी डॉ. पूर्वी जंगम की उपलब्धि विशेष प्रेरणादायी
समारोह में डॉ. मनोहर जोशी, डॉ. सुकृत खांडेकर, प्रा. डॉ. सरिता विजय वाकोडे, डॉ. अनंत गुरव, डॉ. मनीष देशमुख और डॉ. नंदकिशोर जगदाले को सम्मानित किया गया।
इस समारोह का विशेष आकर्षण दृष्टिबाधित विदुषी डॉ. पूर्वी जंगम रहीं। उन्होंने जर्मनी में जाकर ‘दृष्टि से परे सौंदर्यशास्त्र’ विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करते हुए शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उन्होंने जो उपलब्धि हासिल की, वह समाज के लिए प्रेरणादायी है।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने विद्वानों की शैक्षणिक उपलब्धियों और सामाजिक योगदान की सराहना की। समारोह का उद्देश्य ज्ञान, शोध और प्रतिभा का सम्मान करने के साथ-साथ समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी था।
‘विद्वानों के ज्ञान का लाभ नई पीढ़ी तक पहुंचे’
मुंबई मराठी पत्रकार संघ के अध्यक्ष संदीप चव्हाण समारोह में प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने पीएचडीधारक विद्वानों का अभिनंदन करते हुए कहा कि उनके शोध, अनुभव और ज्ञान का लाभ नई पीढ़ी को मिलना चाहिए। पुराने संदर्भों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और वैचारिक विरासत को आज की पीढ़ी तक पहुँचाना आवश्यक है। इससे विद्यार्थियों और युवाओं को समाज तथा इतिहास को समझने की नई दृष्टि मिलेगी।
इस अवसर पर मराठवाड़ा के कट्टर शिवसैनिक महेश भगवंत पाटील को भी सम्मानित किया गया। सभी सम्मानित व्यक्तियों को शॉल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ और स्मृतिचिह्न प्रदान कर उनका अभिनंदन किया गया। पीएचडीधारकों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
शिवसेना अपंग सहाय्य सेना के अध्यक्ष सूर्यकांत ज्ञानदेव लाडे ने प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए अतिथियों का स्वागत किया। वरिष्ठ पत्रकार नीलिमा कदम जांगडा ने अपने रोचक और प्रभावशाली अंदाज में कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि कवि विजय तारी ने आभार प्रदर्शन किया।
ज्ञान का वास्तविक मूल्य समाज के कल्याण में!
यह समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का सम्मान करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज के प्रति विद्वानों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया। शिक्षा और शोध के माध्यम से अर्जित ज्ञान का उपयोग समाज में व्याप्त समस्याओं, अन्याय और पीड़ा को दूर करने के लिए किया जाना चाहिए।
उच्च शिक्षा प्राप्त करना व्यक्तिगत सफलता है, लेकिन उस ज्ञान का उपयोग समाज के उत्थान और महाराष्ट्र की समस्याओं के समाधान के लिए करना ही सच्ची विद्वत्ता है। यही संदेश इस सम्मान समारोह के माध्यम से दिया गया।
