सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में एसआईआर के बीच चुनाव आयोग के डिजिटल मंच ‘ईसीआईनेट’ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने २४ सितंबर को केंद्रीय चुनाव आयोग को पत्र लिखकर सॉफ्टवेयर में चार बदलाव मांगे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा प्रणाली मतदाता पंजीकरण अधिकारियों को कानून से मिले विवेकाधिकार का उपयोग नहीं करने देती।
सॉफ्टवेयर के ‘कार्रवाई करें’ खंड में अधिकारी के पास सीमित विकल्प हैं। किसी मतदाता के दस्तावेज पर्याप्त होने पर भी उसे व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने का विकल्प उपलब्ध नहीं है। इसलिए ‘सुनवाई से छूट’ का नया विकल्प जोड़ने, वैकल्पिक दस्तावेज स्वीकारने और तार्किक विसंगतियों वाले मामलों में स्थानीय अधिकारी को स्वतंत्र निर्णय की अनुमति देने की मांग की गई है। यह मुद्दा इसलिए गंभीर है क्योंकि ३१ अगस्त को जारी महाराष्ट्र की प्रारूप मतदाता सूची में पिछली सूची के मुकाबले करीब २१.१ प्रतिशत मतदाता शामिल नहीं हो सके। इसे अंतिम विलोपन नहीं माना गया है; प्रभावित नागरिक अभी दावा कर सकते हैं। दो चुनाव आयुक्त भी पहले ईसीआईनेट के केंद्रीकृत नियंत्रण और स्थानीय अधिकारियों के अधिकार सीमित होने पर आपत्ति जता चुके हैं। अब महाराष्ट्र के चुनाव प्रमुख का पत्र उन्हीं चिंताओं को मजबूती देता है।
