उल्हासनगर को भ्रष्टाचार की जननी कहें तो कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी। आलम यह है कि उल्हासनगर में रहने वाला हर व्यक्ति इस शहर को सोने की मुर्गी समझता है। यही कारण है कि शासन-प्रशासन के लोग उल्हासनगर को जमकर लूटकर अपना विकास करने में लगे हुए हैं। उल्हासनगर में सार्वजनिक धन से जगह-जगह पर फाउंटेन बनाए गए हैं, पर प्रशासन की अनदेखी के कारण असामाजिक तत्वों ने विभिन्न जगहों पर बने फाउंटेन को तोड़ दिया है। कई फाउंटेन के महंगे सामान चोरी हो गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसे फाउंटेन बनाने की जरुरत ही क्या है? पंजाबी कॉलोनी में प्लास्टिक कारखाने के सामने भी एक फाउंटेन बनाया गया था, जिसे तोड़ दिया गया है। इस फाउंटेन को शकुंतला पाटील ने बनाया था, जिसका आज कोई उपयोग नहीं है। उल्हासनगर में वैसे तो सैकड़ों फाउंटेन बनाए गए हैं, लेकिन एक-आध फाउंटेन ही चलते हैं। ऐसे फाउंटेन केवल कमाने के लिए नगरसेवक लगाते हैं। ऐसे फिजूल खर्च पर लगाम लगाने की जरुरत है।
-हीरो रजाई, उल्हासनगर
