जिंदगी अब हम तेरे कायल नहीं,
मौत से रूबरू का कोई दिल नहीं।
इक लंबी उड़ान से थककर परिंदा,
शजर तलाशता है, कोई मंजिल नहीं।
कश्ती वालों का ही होता है किनारा,
डूबने वालों का कोई साहिल नहीं।
तेरी हर चाल पे निगाह रखता हूं मैं,
खामोश हूं दोस्त, मगर गाफिल नहीं।
गम-शनास लोग ही समझते हैं गम,
हर मुस्कराता चेहरा जन्नत का कायल नहीं।
सबके अपने हर्फ हैं, सबके अपने राज,
नाकामिल दुनिया में कोई कामिल नहीं।
हाकिम होने के भी अपने फायदे हैं,
कत्ल भी कर दूं तो मैं कातिल नहीं।
-विशाल गौड़
