एम एम एस
लीजिए साहब! अब ‘ड्रैगन’ की पूंछ पर पैर रखने की पूरी तैयारी हो चुकी है। अमेरिका के दो सीनियर रिपब्लिकन सांसद, सीनेटर रिक स्कॉट और प्रतिनिधि एलिस स्टेफानिक ने मिलकर चीन के खिलाफ एक नया पैंतरा फेंका है, जिसका नाम है ‘सीसीपी सैंक्शंस शॉट क्लॉक एक्ट’।
सरल भाषा में कहें तो अमेरिका अब चीन से कह रहा है, ‘बहुत हुआ नूडल्स और चाउमीन का खेल, अब सीधे जेल… मतलब प्रतिबंध!’
अभी तक का सरकारी सिस्टम ऐसा था जैसे सरकारी दफ्तर की सुस्त फाइल। राष्ट्रपति हर दो साल में एक रिपोर्ट देते थे कि कौन-कौन सी चीनी कंपनियां अमेरिका की नाक में दम कर रही हैं। लेकिन ट्रेजरी विभाग (वहां का खजाना मंत्रालय) उस पर कार्रवाई कब करेगा? इसकी कोई गारंटी नहीं थी। वो कहते थे, ‘हां भाई, देखेंगे, सोचेंगे, चाय-पानी पीकर बताएंगे।’
लेकिन नए विधेयक ने इस सुस्ती पर ब्रेक लगा दिया है। पहला नियम यह है कि १ साल का अल्टीमेटम मिलेगा। अब जैसे ही किसी चीनी कंपनी का नाम ‘खतरे की लिस्ट’ में आएगा, ट्रेजरी विभाग को ३६५ दिन यानी एक साल के भीतर उस पर प्रतिबंधों का ताला जड़ना ही होगा।
दूसरा नियम है कि शॉट क्लॉक एक्टिव हो जाएगी। बास्केटबॉल की तरह समय टिक-टिक करेगा। तय समय में एक्शन नहीं लिया, तो ‘फाउल’ माना जाएगा।
तीसरा नियम है नो बिजनेस पॉलिसी। सांसद स्कॉट का सीधा कहना है कि जो चीन के मिलिट्री विंग के लिए काम कर रहा है, उसे अमेरिका में डॉलर कमाने का कोई हक नहीं है। सांसद रिक स्कॉट का कहना है कि कम्युनिस्ट चीन हमारा दुश्मन है और अब हमें जाग जाना चाहिए। शायद वह चीन के सस्ते माल से तंग आ चुके हैं। उनका मानना है कि जब कोई हमारी सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए, तो इंतजार नहीं करना चाहिए। सांसद स्टेफानिक ने भी साफ कर दिया है कि चीन की कंपनियों पर अमेरिकी निर्भरता को कम करने का यह सबसे झन्नाटेदार तरीका है। उन्होंने कहा कि यह एक व्यावहारिक कानून है, जो ट्रेजरी विभाग की देरी को खत्म करेगा। कुल मिलाकर, अमेरिका ने चीन को साफ कह दिया है ‘तुम्हारी चालें पुरानी हो गईं, अब हमारी ‘शॉट क्लॉक’ शुरू हो चुकी है!’ यानी की उल्टी गिनती शुरू!
