अरुण कुमार गुप्ता
दिनोंदिन देश के आर्थिक हालात खराब होते जा रहे हैं। डॉलर की कीमत ९७ रुपए तक पहुंच रही है। जानकार कहते हैं कि जल्द ही यह कीमत १०० को पार कर सकती है और कुछ ही समय बाद ११० रुपए तक पहुंच जाए तो आश्चर्य नहीं होगा, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री को इसे लेकर कोई चिंता नहीं है। ग्लोबल रैंकिंग की टॉप १०० कंपनियों में देश की एक भी कंपनी शामिल नहीं है। आज देश का हर व्यक्ति परेशान है। घर चलाना मुश्किल हो गया है। ईवीएम और चुनाव आयोग की मदद से सरकार तो बना ली, लेकिन देश के लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। इन्वेस्टर मोदी की मैनिपुलेटेड विक्ट्री पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। इसके बावजूद आत्ममुग्ध मोदी जी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को चॉकलेट भेंट कर रील बनाने में व्यस्त हैं। नॉर्वे की एक पत्रकार ने जब सवाल पूछा, तो मोदी जी की हालत पतली हो गई और वह पतली गली से निकल गए। देश का समुचित नेतृत्व करने के बजाय वे नौटंकी में व्यस्त हैं। जनता रोती है तो रोती रहे, मोदी जी को क्या फर्क पड़ने वाला है।
कायरता की
हदें पार!
इस देश में न तो लोकतंत्र बचा है और न ही बोलने की स्वतंत्रता। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स हैंडल को ब्लॉक करवाकर ५६ इंच के कागजी शेर ने यह सिद्ध कर दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी कोई ट्रेडिशनल पार्टी नहीं है, बल्कि बेरोजगारी, तानाशाही, गुंडागर्दी और नेताओं के भ्रष्टाचार को आईना दिखाने वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। इसे करोड़ों की संख्या में फॉलो किया जाना युवाओं के प्रâस्ट्रेशन को दर्शाता है, लेकिन इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करवाकर सरकार ने कायरता की सारी हदें पार कर दी हैं। बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स हैंडल अकाउंट गुरुवार को ब्लॉक कर दिया गया। इसके कुछ देर बाद संगठन ने नया अकाउंट बनाया। इसका नाम ‘कॉकरोच इज बैक’ रखा गया और बायो में लिखा, ‘कॉकरोच डोंट डाइ’, यानी कॉकरोच मरते नहीं। अकाउंट से पहली पोस्ट दोपहर २:२९ बजे की गई। शुक्रवार सुबह ७:०० बजे तक फॉलोअर्स की संख्या १.०९ लाख से ज्यादा हो गई।
