मुख्यपृष्ठस्तंभतरकश : अन्ना की टोपी, कॉकरोच की पार्टी

तरकश : अन्ना की टोपी, कॉकरोच की पार्टी

धनुर्धर
पांच देशों के दौरे पर गए पीएम मोदी ने उधर खुशनुमा माहौल में मेलोडी का पिटारा खोला, तस्वीरें इंटरनेट पर बिखेरीं और इधर पूरा सोशल मीडिया कॉकरोचों से खदबदा उठा। मेलोडी इतनी चॉकलेटी होगी, इसका अंदाजा न तो उन्हें था, न उनके आसपास मौजूद लोगों को। हालांकि, कॉकरोच का कोई सीधा नाता नहीं था मेलोडी से। उनमें से बहुतों को पता ही नहीं था कि मेलोडी का पिटारा खुलनेवाला है। वे तो अपनी अलग वजहों से बेचैन थे। लेकिन अब तो जो होना था, हो चुका था। तत्काल इन कॉकरोचों को भगाने और सोशल मीडिया को साफ करने का अभियान शुरू हुआ।
कहां से आए
जहां से कॉकरोच पैâलने शुरू हुए थे, उस नाली को यानी संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट को बंद कर दिया गया। उसे राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की संप्रभुता के लिए खतरा घोषित करने में भी देर नहीं की गई। लेकिन कॉकरोच हैं कि पैâलते ही जा रहे हैं। दिक्कत यह है कि कॉकरोचों की असल पहचान जितनी मुश्किल है, उनके उद्गम स्थलों की निशानदेही भी उतनी ही चुनौतीपूर्ण। वे जिस नाली से निकलते हुए दिख रहे होते हैं, वह तो एक रास्ता भर होता है उनके आने का। आप एक रास्ता बंद कर दें, वे दूसरे रास्ते से घुस आएंगे। यही होने भी लगा है।
अंदाजा हो गया था
वैसे पीएमजी को इसका कुछ अंदाजा हो गया था पहले ही। वे अनुभवी और दूरदर्शी नेता हैं। कहां कितनी गंध पैâल चुकी है, उन्हें पता रहता है। सो, विधानसभा चुनावों के नतीजे आने और पश्चिम बंगाल के अभेद्य दुर्ग पर अपना कब्जा स्थापित कर लेने के बाद स्थिर चित्त से उन्होंने आमजनों के लिए कुछ उपदेश निकाले, डूज एंड डोंट्स की लिस्ट घोषित की और तत्काल विदेश निकल लिए।
नॉर्वे की लेडी कॉकरोच
मालूम था कि देश में जो भी गड़बड़ होगी, उसे उनके लोग संभाल लेंगे। विदेश यात्रा में कोई खलल नहीं पड़ेगी। जगह-जगह नृत्य-संगीत के कार्यक्रमों का इंतजाम था ही। मगर उन्हें क्या पता था कि एक कॉकरोच नॉर्वे में भी घात लगाए बैठा है। पत्रकार वेश में उस लेडी कॉकरोच ने ऐसा सवाल दाग दिया कि विदेश यात्रा का पूरा ताम-झाम फीका पड़ गया। उससे निपटने की सोच ही रहे थे कि कॉकरोच की पूरी फौज ही निकल आई। बात किसी एक अकाउंट तक रह नहीं गई है कि उसे बंद करवा देने से कॉकरोच गायब हो जाएंगे।
जज साहब की जबान
पता नहीं किस मुहूर्त में जज साहब के मुंह से यह शब्द निकला था। वैसे उन्हें भी क्या मालूम था कि उनकी जबान पर सरस्वती विराजमान हो जाएंगी। उन्होंने तो घुमा-फिराकर माफी भी मांग ली अपने बयान के लिए। लेकिन कॉकरोच हैं कि मानने को तैयार ही नहीं। अपनी पार्टी बना ली, उसका थीम सॉन्ग पर थीम सॉन्ग निकाले जा रहे हैं और फॉलोवर्स बढ़ते ही जा रहे हैं।
एक ही प्रोफाइल पिक
जिधर देखो कॉकरोच वाली प्रोफाइल पिक ही नजर आती है। बिल्कुल अन्ना आंदोलन जैसा सीन है। तब हर सिर पर अन्ना वाली टोपी दिखती थी- मैं भी अन्ना तुम भी अन्ना अब तो सारा देश है अन्ना। ठीक वैसे ही आज जिसे देखो खुद को कॉकरोच साबित करने पर तुला हुआ है। कॉकरोच पार्टी के नारे ही नहीं, वादे भी दिलचस्प हैं। वे चुनाव में गड़बड़ी करनेवाले अधिकारियों और कर्मचारियों को जेल भेजने की बात कर रहे हैं। कहते हैं कि किसी जज को रिटायरमेंट के बाद कोई पद नहीं मिलना चाहिए। यही नहीं, किसी चीफ जस्टिस को सेवानिवृत्ति के बाद राज्यसभा भेजने पर भी रोक लगा देना चाहते हैं।
हिट्स की बाढ़
ये बातें तो जनता को अच्छी ही लगती हैं। अच्छी लग रही हैं। इस पार्टी से जुड़े वीडियो पर हिट्स की बाढ़ आ रही है। लाजिमी है कि सरकार की चिंता बढ़ती जा रही है। पीएम जी स्वदेश लौट आए हैं, लेकिन ये कॉकरोच तो देश-विदेश हर जगह छाते नजर आ रहे हैं। इनका क्या किया जाए वे समझ नहीं पा रहे।
कैसे कबूलें
आम लोग भी वैसे ही असमंजस में हैं। जज साहब की बातों से उनका खून तो खौला है, चुनाव को एकतरफा खेल बना देने का करतब भी उन्हें जम नहीं रहा, महंगाई की मार से जीना मुहाल हो रहा है, यह उनसे बेहतर कौन समझ सकता है। कॉकरोचों की हरकतें उनके सिर पर बढ़ते बोझ को कम नहीं कर रहीं। हां, उनके मुंह पर थोड़ी हंसी जरूर ला रही है। फिर भी मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा। बात, दरअसल यह है कि अन्ना-केजरी का जला देश कॉकरोच को बिना पंâूके कबूले भी वैâसे!

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