मुख्यपृष्ठविश्वअमेरिका-चीन के बीच फंसा पाकिस्तान ... बलूचिस्तान बना मुसीबत की जड़!

अमेरिका-चीन के बीच फंसा पाकिस्तान … बलूचिस्तान बना मुसीबत की जड़!

पाकिस्तान के सैन्य और नागरिक नेतृत्व के लिए अमेरिका और चीन दोनों को एक साथ साधने की नीति अब उलटी पड़ती दिख रही है। आर्मी चीफ असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आर्थिक संकट से जूझते पाकिस्तान को राहत दिलाने के लिए कभी वॉशिंगटन को बड़े रणनीतिक वादे किए, तो कभी बीजिंग के सामने पुराने भरोसे को दोहराया। लेकिन अब वही वादे उनके गले की फांस बनते जा रहे हैं। पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन के सामने बलूचिस्तान की खनिज संपदा तक अमेरिकी कंपनियों की पहुंच का आश्वासन दिया था। बलूचिस्तान तांबा, सोना, लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की संभावनाओं वाला इलाका माना जाता है। अमेरिका इन खनिजों को अपनी सामरिक और औद्योगिक जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम मानता है। यही वजह है कि वॉशिंगटन अब पाकिस्तान से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस खनन स्थलों, परियोजना योजना और सुरक्षा गारंटी की मांग कर रहा है। अमेरिका के सहायक विदेश सचिव पॉल कपूर और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बीच हुई बैठक में इसी मुद्दे पर कड़ा रुख देखने को मिला। अमेरिकी पक्ष का सवाल सीधा था, खनिज खोज और निवेश के लिए कंपनियां तैयार हैं, लेकिन जमीन पर स्थान और सुरक्षा की व्यवस्था कहां है? पाकिस्तान के लिए यही सबसे बड़ी समस्या है। बलूचिस्तान में अलगाववादी हिंसा, स्थानीय असंतोष और सुरक्षा संकट लंबे समय से मौजूद हैं। ऐसे में विदेशी कंपनियों को वहां भेजना जोखिम भरा है। दूसरी ओर चीन भी पाकिस्तान से नाराज बताया जा रहा है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी सीपीईसी के तहत बलूचिस्तान में चल रही परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर बीजिंग पहले से चिंतित है। चीनी नागरिकों और परियोजनाओं पर हमलों ने चीन का भरोसा कमजोर किया है।

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