सामना संवाददाता / नई दिल्ली
इटली की फर्स्ट लेडी को मोदी द्वारा दी गई मेलोडी शायद पसंद नहीं आई। यही वजह है कि इटली के बंदरगाह पर भारतीय जहाज रोक दिए गए। बताया जाता है कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के दखल के बाद इटली के अधिकारियों ने भारत से इजरायल भेजा जा रहा ‘सैन्य-ग्रेड स्टील’ की तीन बड़ी खेपों को अपने बंदरगाहों पर रोक दिया।
यह कार्रवाई तब हुई, जब कार्यकर्ता समूहों ने इस बात का खुलासा किया कि इस स्टील का इस्तेमाल इजरायली सेना के लिए हथियार और गोला-बारूद बनाने में किया जाना है। इटली से एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी’ द्वारा ले जाई जा रही इन खेपों को इटली के जियोइया टॉरो और काग्लियारी बंदरगाहों पर रोका गया है। ‘बॉयकॉट, डाइवेस्टमेंट एंड सैंक्शंस’ आंदोलन और ‘नो हार्बर फॉर जेनोसाइड’ जैसे वैश्विक नागरिक समाज संगठनों की ट्रैकिंग और निगरानी के कारण इन खेपों की पहचान हो सकी। कार्यकर्ता समूहों ने बताया कि रोकी गई खेप में कुल ८०६ टन स्टील शामिल है।
नो हार्बर फॉर जेनोसाइड के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह स्टील रामत हशारोन गोला-बारूद प्लांट के लिए भेजा जा रहा था, जहां नागरिकों के लिए किसी भी तरह का कोई उत्पादन नहीं होता है। वहां शत-प्रतिशत केवल सैन्य उत्पादन होता है।
इजरायल की सैन्य आपूर्ति शृंखला बाधित करने के प्रयास तेज
इटली के श्रमिक संघ नहीं चाहते युद्ध को बढ़ावा मिले
अक्टूबर २०२३ से गाजा में जारी संघर्ष के बाद से ही दुनियाभर के सामाजिक संगठनों, अदालती पैâसलों और बंदरगाह श्रमिकों के हस्तक्षेपों के जरिए इजरायल की सैन्य आपूर्ति शृंखला को बाधित करने के प्रयास तेज हो गए हैं। इटली में भारत से जा रहे इस स्टील कार्गो को रोका जाना, इसी वैश्विक दबाव और निगरानी का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस स्टील का इस्तेमाल इजरायली सेना के लिए लगभग १७,४५८ तोपखाने के गोले बनाने के लिए किया जा सकता था। यह खेप भारत के औरंगाबाद में स्थित ‘आरएल स्टील्स एंड एनर्जी लिमिटेड’ से भेजी गई थी। इस कार्गो की अंतिम मंजिल इजरायल के रामत हशारोन में स्थित ‘आईएमआई सिस्टम्स’ (जो अब एलबिट सिस्टम्स लैंड के नाम से जानी जाती है) की मुख्य हथियार निर्माण पैâक्टरी थी। रिपोर्ट के अनुसार, कार्यकर्ताओं की पैनी नजर और ट्रैकिंग शुरू होने के बाद, तीन अन्य खेपों के रास्ते को बदलकर उन्हें श्रीलंका की ओर डायवर्ट कर दिया गया था। कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कानूनी और सामाजिक जांच से बचने के लिए कई मामलों में शिपिंग मार्गों और गंतव्यों को जानबूझकर अस्पष्ट या गुप्त रखा गया था। हाल ही में इटली, ग्रीस, बास्क देश, मोरक्को और तुर्की सहित २० से अधिक बंदरगाहों के श्रमिकों ने डॉकवर्कर्स डोंट वर्क फॉर वॉर के बैनर तले संयुक्त कार्रवाई में हिस्सा लिया था।
