-कहीं चल रहे लात-घूंसे, कहीं दिव्यांग कोच में दबंगई
-चलती लोकल ट्रेन में युवक की बेरहमी से पिटाई, अस्पताल में भर्ती
जेदवी / मुंबई
मुंबई की लोकल ट्रेनें अब यात्रियों के लिए सुरक्षित सफर का माध्यम कम और झगड़े-मारपीट का अखाड़ा ज्यादा बनती जा रही हैं। कहीं चलती ट्रेन में लात-घूंसे बरस रहे हैं तो कहीं दिव्यांगों के लिए आरक्षित डिब्बों में दबंगई का आरोप सामने आ रहा है। लगातार बढ़ती भीड़, नियमों की अनदेखी और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ताजा मामला पश्चिम रेलवे की अंधेरी-विरार लोकल का है, जहां बोरीवली और दहिसर स्टेशन के बीच चलती ट्रेन में १० से १२ युवकों के समूह ने कथित तौर पर एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हमलावर ट्रेन के हैंडरेल पकड़कर और सीटों पर चढ़कर युवक पर लगातार लात-घूंसे बरसाते दिखाई दे रहे हैं। गंभीर रूप से घायल युवक को इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल मारपीट की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है, जबकि रेलवे अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेकर जांच शुरू कर दी है।
उधर, मध्य रेलवे की लोकल ट्रेनों में दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित कोच भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। यात्रियों के अनुसार, सुबह डोंबिवली से चलने वाली भीड़भाड़ वाली लोकल में दिव्यांग डिब्बे पर बड़ी संख्या में अनधिकृत यात्रियों का कब्जा था। जब दिव्यांग यात्रियों ने इसका विरोध किया तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्रता की गई, उन्हें धमकाया गया और दबंगई दिखाई गई। इससे दिव्यांग यात्रियों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
एक दिन पहले ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें चलती लोकल ट्रेन में दो ट्रांसजेंडर महिलाओं और एक व्यक्ति के बीच मारपीट दिखाई दी थी। इसके अलावा नालासोपारा जाने वाली लोकल में मयंक लोहार की हत्या की घटना ने भी यात्रियों को झकझोर दिया था। आरोप है कि दरवाजा खुला या बंद रखने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और चाकू मारकर हत्या कर दी गई। बाद में आरोपी रोशन रमेश सुवर्णा को पनवेल क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
यात्रियों ने मांग की है कि दिव्यांग डिब्बों में अनधिकृत प्रवेश पर सख्ती से रोक लगाई जाए, नियमित निगरानी बढ़ाई जाए और मारपीट तथा धमकी देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि लोकल ट्रेनों में कानून का डर दोबारा कायम हो सके।
