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महायुति का विकास मॉडल हुआ बेनकाब…पानी के इंतजाम के लिए विधायकों की निधि पर डाका!.. हर काम के लिए २५ लाख रुपए तक खर्च की छूट

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में सूखे और पानी की किल्लत ने महायुति सरकार की नाकामी की पोल खोल दी है। राज्य ३२ जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद अब सरकार के सामने उस सूखे से निपटने के लिए आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। इस सरकार ने विधायकों की स्थानीय विकास निधि में कटौती कर उसे जल संकट से उबरने के लिए इस्तेमाल करने का पैâसला किया है। इसके लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। पानी की किल्लत दूर करने के नाम पर विधायक निधि से प्रति काम अधिकतम २५ लाख रुपए खर्च करने की अनुमति दी गई है। राज्य में जल संपदा विभाग से निधि जाने के बजाय अन्य योजनाओं की निधि खर्च की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, सरकार की आर्थिक हालत खराब हो गई है इसीलिए सूखे से निपटने के लिए विधायकों की विकास निधि का सहारा लेना पड़ रहा है?
महायुति सरकार एक तरफ विकास और मजबूत अर्थव्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन दूसरी तरफ जमीन पर हालात इतने बिगड़ गए हैं कि गांवों और शहरों में पानी की व्यवस्था के लिए विधायकों की निधि का रुख करना पड़ रहा है।

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