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मंत्रियों की स्थिति होगी ‘बदतर’ अगर रिटायरमेंट उम्र हुई सत्तर! …६-७ सितंबर पर टिकी निगाहें, मोदी मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की अटकलें

७० पार के दिग्गजों पर गिरेगी गाज या अनुभव को मिलेगी तरजीह?
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की चर्चाओं ने एक बार फिर दिल्ली का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। सियासी गलियारों में छह और सात सितंबर की तारीख को लेकर खासा कयास लगाया जा रहा है। चर्चा है कि कई मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, कुछ नए चेहरों की एंट्री हो सकती है और सहयोगी दलों को भी सत्ता में हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिल सकता है। लेकिन इन तमाम अटकलों के बीच सबसे ज्यादा निगाह उन दिग्गज मंत्रियों पर है, जो ७० वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं। यदि भाजपा अपने पुराने ‘७०-प्लस’ या उम्र संबंधी फार्मूले को मंत्रिमंडल पर किसी रूप में लागू करती है तो मोदी सरकार के कई बड़े और महत्वपूर्ण चेहरे इसकी जद में आ सकते हैं।
मौजूदा वैâबिनेट में ७० वर्ष से अधिक उम्र वाले नेताओं में सबसे वरिष्ठ जीतन राम मांझी हैं। मांझी ८१ वर्ष के हैं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय संभाल रहे हैं। इसके बाद ७५ वर्षीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का नाम आता है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ७४ वर्ष के हैं, जबकि वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह भी ७४ वर्ष की उम्र के करीब हैं। आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ७२ वर्ष के हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार भी ७२ वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और पंचायती राज तथा मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह दोनों ७१ वर्ष के हैं। यानी उम्र का पैमाना यदि सचमुच मंत्रिमंडल फेरबदल का आधार बनाया गया तो जीतन राम मांझी, राजनाथ सिंह, हरदीप सिंह पुरी, गिरिराज सिंह, मनोहर लाल खट्टर, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. एस. जयशंकर और राजीव रंजन सिंह ‘ललन सिंह’ जैसे आठ कैबिनेट मंत्रियों की िजम्मेदारियों पर सवाल खड़े हो सकते हैं। सियासी चर्चा यह भी है कि संभावित फेरबदल केवल उम्र के आधार पर नहीं, बल्कि मंत्रालयों के प्रदर्शन, आगामी राज्यों के चुनाव, सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों की मांगों को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।

मोदी ७६ के होंगे, तो ७० साल का नियम कैसे लागू होगा?
इस फार्मूले का सबसे दिलचस्प पहलू खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। मोदी १७ सितंबर को ७६ वर्ष के हो जाएंगे। ऐसे में यदि ७० वर्ष की आयु को कोई कठोर राजनीतिक कसौटी बनाया जाता है तो सवाल केवल मंत्रियों तक सीमित नहीं रहेगा।

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